जलमग्न हुई रेल पटरियां, ट्रेनों का संचालन ठप
गुजरातः सूरत में लगातार हो रही भारी बारिश के कारण जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। सरथाणा इलाके में स्थित आदर्श निर्वासित स्कूल में पानी भर जाने के कारण वहां 37 बच्चे और स्कूल का स्टाफ फंस गया था, जिन्हें सूरत पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए सुरक्षित बाहर निकाल लिया। इसी तरह, व्रजचौक इलाके में भारी जलजमाव के कारण एक एसटी (ST) बस बीच रास्ते में फंस गई। फायर ब्रिगेड की टीम ने तुरंत मौके पर पहुंचकर बस में सवार 26 यात्रियों को ट्रैक्टर की मदद से सुरक्षित बाहर निकाला। वहीं सूरत के सचिन महावीर सोसायटी के कॉमन प्लाट में बारिश के पानी में डूबकर 2 बच्चों की मौत हो गई।
मिली जानकारी के अनुसार खेलते-खेलते गड्ढे में गिरने से यह हादसा हुआ है। घटना की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची दमकल विभाग और पुलिस की टीम द्वारा तलाशी अभियान जारी है। बता दें कि पिछले 24 घंटों में जिले में 7 इंच बारिश दर्ज की गई है। सूरत के कई इलाके में जलभराव की हालात हैं और फंसे लोगों को निकालने का काम जारी है। मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक, आगामी 24 घंटों के दौरान सूरत और दक्षिण गुजरात में भारी से अति भारी बारिश की संभावना है। हालांकि, 9 जुलाई से बारिश में कमी आएगी। मनपा के आंकड़ों के मुताबिक, सेंट्रल जोन में सबसे ज्यादा 105 मिमी बारिश दर्ज की गई। सबसे चिंताजनक तस्वीरें शहर के व्यस्ततम इलाकों में शामिल सहारा दरवाजा रेलवे अंडरपास से सामने आईं, जो भारी जलभराव के कारण तालाब में तब्दील हो गया। भारी बारिश के कारण शहर के कोट विस्तार, रांदेर, कतारगाम समेत कई निचले इलाके जलमग्न हो गए।
हजारों लोग ट्रैफिक में फंस गए। विजिबिलिटी घटकर महज 500 मीटर रह गई थी। भारी बारिश के कारण कई जगहों पर मोपेड, बाइक और कार पानी में बंद हो गईं। वाहन चालकों को अपने वाहनों को धक्का मारकर बाहर निकालने के लिए मजबूर होना पड़ा। दक्षिण गुजरात में भारी बारिश के अलर्ट के चलते प्रशासन ने नागरिकों से अपील की गई है कि किसी भी आपदा या परेशानी की सूचना तुरंत जिला आपदा नियंत्रण कक्ष के हेल्पलाइन नंबर 1077 पर दें और अफवाहों से दूर रहें। मौसम विभाग से हर 3 घंटे मिलने वाले मौसम अपडेट के आधार पर आवश्यक तैयारियां की जा रही हैं। सूरत के वसई-विरार क्षेत्र में कुछ ही घंटों में करीब 300 मिमी बारिश होने से सफाले, केलवे रोड, वसई रोड और नालासोपारा स्टेशनों के बीच रेल पटरियां जलमग्न हो गईं। इसके चलते मुंबई की ओर जाने वाली लंबी दूरी की ट्रेनों का संचालन ठप हो गया।

