अमृतसरः मकबूलपुरा इलाके स्थित गुरुद्वारा दमरदमा साहिब में मानवाधिकार कार्यकर्ता जसविंदर सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित फिल्म ‘सतलुज’ की विशेष स्क्रीनिंग करवाई गई। यह पहल समाज सेविका डॉ. जसविंदर कौर सोहल ने की। इस मौके पर बड़ी संख्या में संगत ने फिल्म देखी। स्क्रीनिंग के दौरान बोलने वाले विभिन्न वक्ताओं ने दावा किया कि फिल्म में पंजाब के 1980‑90 के दशक के दौरान मानवाधिकारों से जुड़ी घटनाओं और जसवंत सिंह खालड़ा द्वारा किए गए काम को दर्शाया गया है।
उन्होंने फिल्म पर लगे प्रतिबंध का विरोध करते हुए कहा कि इतिहास और मानवाधिकारों से जुड़े मुद्दों को लोगों तक पहुंचने से नहीं रोका जाना चाहिए। इस मौके पर मनदीप सिंह ने कहा कि उनके विचार में फिल्म को बैन नहीं किया जाना चाहिए था और लोगों को अपनी इच्छा से इसे देखने का अधिकार होना चाहिए। उनका कहना था कि फिल्म में दिखाए गए विषयों पर खुलकर चर्चा होनी चाहिए। पूजा शर्मा ने कहा कि जसवंत सिंह खालड़ा ने दूसरों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया और ऐसी फिल्मों के जरिये नई पीढ़ी को इतिहास के बारे में जानकारी मिलती है। उन्होंने भी फिल्म पर लगे प्रतिबंध का विरोध किया।
समाजसेवी और एसए पंजाब की चेयरपर्सन डॉ. जसविंदर कौर सोहल ने कहा कि उन्होंने यह मुहिम गुरुद्वारा दमरदमा साहिब से शुरू की है और आगे स्कूलों, कॉलेजों और अन्य स्थानों पर भी फिल्म की स्क्रीनिंग करके लोगों को जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन और मानवाधिकारों से जुड़े मसलों के बारे में जागरूक कराया जाएगा। उन्होंने फिल्म पर लगे प्रतिबंध की आलोचना करते हुए कहा कि इससे लोगों की दिलचस्पी और बढ़ गयी है।

