अमृतसरः श्री अकाल तख्त साहिब ने पंजाब की आप सरकार को बेअदबी कानून जागत ज्योत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) एक्ट-2026 में एक महीने में संशोधन करने का आदेश दिया है। इस अवधि के भीतर श्री अकाल तख्त साहिब की ओर से दिए गए सुझावों के अनुरूप कानून में आवश्यक संशोधन करने के लिए कहा गया है। श्री अकाल तख्त साहिब पर जत्थेदार साहिब से मुलाकात के बाद पंजाब विधान सभा के अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवां और वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने मीडिया से बातचीत करते हुए बैठक को सार्थक बताया। अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवां ने कहा कि गुरु रामदास पातशाह की कृपा से उन्हें दरबार साहिब में अरदास करने का अवसर मिला। इससे पहले जत्थेदार साहिब के बुलावे पर वे और आम आदमी पार्टी के मंत्री तथा विधायक श्री अकाल तख्त साहिब पर विनम्रतापूर्वक उपस्थित हुए।
उन्होंने बताया कि जत्थेदार साहिब के साथ लंबी और सार्थक विचार-विमर्श हुआ है और सरकार इस दौरान सामने आए सुझावों पर विचार करेगी। उन्होंने कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब की मान-मर्यादा को ध्यान में रखते हुए बैठक के विवरणों को सार्वजनिक करना उचित नहीं है। इस अवसर पर वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने बताया कि माननीय जत्थेदार साहिब ने सभी विधायकों को एक महीने का समय दिया है। उन्होंने कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब की ओर से कुछ संशोधन पंजाब विधान सभा के अध्यक्ष के माध्यम से भेजे जाएंगे। जैसे ही ये संशोधन प्राप्त होंगे, सरकार और विधायक उन पर विस्तार से विचार-विमर्श करेंगे और एक महीने के भीतर अपना निर्णय लेंगे।
अकाल तख्त के आदेश पर पंजाब सरकार के सभी सिख मंत्री और विधायक श्री अकाल तख्त साहिब पहुंचे। सभी अपने साथ लिखित स्पष्टीकरण भी लेकर आए, जिसे पांच सिंह साहिबानों के समक्ष प्रस्तुत किया गया। आज श्री अकाल तख्त साहिब में हुई सुनवाई के दौरान अकाल तख्त जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज ने कानून पर 6 एतराज जताए। उन्होंने कहा कि सरकार बेअदबी करने वालों को सजा देने के लिए कानून बनाए, इस पर कोई एतराज नहीं है, लेकिन सिख शब्दावली, मर्यादा और पंथ से जुड़े मामलों में विधानसभा फैसला नहीं कर सकती। ऐसे में तब तक इस कानून को होल्ड किया जाए। आप के मंत्रियों-विधायकों ने श्री अकाल तख्त को लिखित स्पष्टीकरण दिया। सुनवाई से पहले जत्थेदार ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के दो वीडियो भी दिखाए।
पेशी के लिए आप के सभी सिख मंत्री और विधायक नंगे पैर लिखित स्पष्टीकरण के साथ अकाल तख्त पहुंचे। इस दौरान केवल सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी ही नहीं, बल्कि कांग्रेस, शिरोमणि अकाली दल और निर्दलीय विधायक भी मौजूद रहे। सुनवाई के दौरान वर्ष 2008 में किए गए संशोधन का भी उल्लेख हुआ। बताया गया कि उस समय शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी से प्रस्ताव और राय ली गई थी, जबकि इस बार ऐसा नहीं किया गया। इस पर डॉ. इंद्रबीर सिंह निज्जर ने कहा कि सेलेक्ट कमेटी ने सुझाव लेने की प्रक्रिया के दौरान शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी को भी औपचारिक निमंत्रण भेजा था और अपने सुझाव देने के लिए कहा था।

