तरनतारनः जिले में स्वास्थ्य विभाग और पुलिस द्वारा की गई संयुक्त कार्रवाई के दौरान अवैध नशा मुक्ति केंद्र का पर्दाफाश किया गया। दरअसल, इस छापेमारी के दौरान केंद्र का संचालक कथित तौर पर पिछली दीवार फांदकर भाग गया, जबकि 52 मरीजों को इमारत से बचाया गया। इस मामले की जांच शुरू कर दी गई है। जिला चिकित्सा आयुक्त डॉ. रूपम चौधरी ने कहा कि विभाग को सूचना मिली थी कि एक नशा मुक्ति केंद्र बिना इजाजत के चल रहा है, और मरीजों के साथ दुर्व्यवहार और मारपीट की शिकायतें भी मिली हैं।
शिकायत के आधार पर, स्वास्थ्य विभाग और पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई की। जांच से पता चला कि 52 मरीजों को सिर्फ 20 लोगों के लिए बनाए गए कमरे में रखा जा रहा था। अधिकारियों के अनुसार, इस सुविधा में बुनियादी सुविधाओं की भी कमी थी और मरीज भीड़भाड़ वाले हालात में रह रहे थे। बचाए गए कई मरीजों ने आरोप लगाया कि केंद्र में उन पर नियमित रूप से मारपीट की जाती थी।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक मरीज से प्रति माह 15,000 से 20,000 रुपये वसूले जाते थे, लेकिन फिर भी उन्हें सही इलाज और जरूरी सुविधाओं से वंचित रखा जाता था। कार्रवाई के दौरान, सेंटर के तीन संचालक मौके से भाग गए। पुलिस उनकी तलाश कर रही है। स्वास्थ्य विभाग इस बात की जांच कर रहा है कि यह सेंटर कितने समय से बिना इजाजत के चल रहा था और इसमें कौन-कौन शामिल थे। प्रशासन का कहना है कि इस मामले की गहराई से जांच की जाएगी और अगर जिले में अन्य अवैध नशा मुक्ति केंद्र चलते पाए गए तो उनके खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

