कपूरथलाः पंजाब में कांग्रेस पार्टी के विधायक सुखपाल सिंह खैरा पर एक महिला के कथित यौन उत्पीड़न करने के आरोप में FIR दर्ज कर ली गई है। कपूरथला जिले की भुलत्थ विधानसभा सीट से विधायक सुखपाल खैरा पर यह FIR आम आदमी पार्टी के एक नेता की शिकायत के बाद दर्ज की गई है। कांग्रेस विधायक खैरा ने पुलिस की कार्रवाई को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताते हुए आरोप लगाया कि AAP सरकार उनकी आवाज दबाने की कोशिश कर रही है। सुखपाल सिंह खैरा पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 75(1)(iv), 75(3), 79, 351 और 61 के साथ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67 लगाई गई है।
पुलिस के मुताबिक, मामला सोशल मीडिया पर किए गए उन पोस्ट और टिप्पणियों से जुड़ा है, जिनमें महिला नेता के चरित्र, व्यवहार और प्रतिष्ठा को लेकर कथित तौर पर आपत्तिजनक और आधारहीन बातें कही गई थीं। हालांकि, FIR में दर्ज आरोप जांच का विषय हैं और इन्हें अदालत में साबित किया जाना बाकी है। इस मामले में पंजाब पुलिस के स्टेट साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक कार्यालय की ओर से 27 सितंबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X को ई-मेल भेजा गया था। इसमें खैरा और दो अन्य अकाउंट से जुड़े पोस्ट हटाने का निर्देश दिया गया था। पुलिस ने X को तीन घंटे के भीतर संबंधित सामग्री की पहुंच बंद करने और रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के लिए कहा था।
पुलिस के नोटिस में कहा गया था कि संबंधित पोस्ट में महिला के चरित्र और प्रतिष्ठा को निशाना बनाने वाली कथित अपमानजनक, आपत्तिजनक और बेबुनियाद बातें थीं। नोटिस के मुताबिक, इन टिप्पणियों के समर्थन में कोई विश्वसनीय, सत्यापित या पर्याप्त सामग्री उपलब्ध नहीं कराई गई थी और इससे संबंधित महिला की प्रतिष्ठा और निजता प्रभावित हो सकती थी। दरअसल, यह मामला सितंबर के आखिरी सप्ताह में शुरू हुआ था। सुखपाल खैरा ने चंडीगढ़ के सेक्टर-39 में एक सरकारी आवास को लेकर सवाल उठाए थे। उनका आरोप था कि AAP के पंजाब प्रभारी मनीष सिसोदिया से जुड़े लोगों की ओर से ऐसे सरकारी आवास का इस्तेमाल किया जा रहा है, जो पंजाब सरकार के एक मंत्री को आवंटित बताया गया था।
इसी विवाद के दौरान खैरा ने आप की महिला नेता गायत्री बिश्नोई को लेकर भी सोशल मीडिया पर टिप्पणियां की थीं। बिश्नोई ने खैरा के आरोपों को खारिज करते हुए उन पर अपने चरित्र पर हमला करने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि वह अपने पिता के इलाज के दौरान मंत्री को आवंटित आवास में उनके परिवार की अनुमति से रह रही थीं। इस विवाद ने बाद में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का रूप ले लिया। मामले में पंजाब राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष ने भी खैरा की टिप्पणियों की आलोचना की थी। महिला नेता की ओर से कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दिए जाने की बात भी सामने आई थी।
