अमृतसरः श्री हेमकुंड साहिब की तीर्थयात्रा के लिए भारतीय वीज़ा पाने वाले 100 से ज़्यादा पाकिस्तानी सिख तीर्थयात्री फैसलाबाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर फंस गए। खबरों के मुताबिक, पाकिस्तानी अधिकारियों ने उनसे NOC (अनापत्ति प्रमाण पत्र) की मांग करते हुए उन्हें दुबई जाने वाली फ्लाइट में सवार होने से रोक दिया। बताया जा रहा है कि श्रद्धालुओं को फैसलाबाद एयरपोर्ट पर करीब 12 घंटे से रोककर रखा गया है। दरअसल, तीर्थयात्रियों को दुबई से आगे नई दिल्ली की यात्रा करनी थी। हाल ही में भारत ने 104 सिख श्रद्धालुओं को वीज़ा जारी किया था।
वाघा-अटारी ज़मीनी रास्ते के उपलब्ध न होने के कारण, तीर्थयात्रियों को पहले ही किसी तीसरे देश से होकर यात्रा करने का विकल्प चुनना पड़ा था, जो काफी महंगा था। एयरपोर्ट पर मंज़ूरी का इंतज़ार करने के बाद, तीर्थयात्रियों का कहना है कि उनकी फ्लाइट छूट गई, जिससे उन्हें काफी आर्थिक नुकसान हुआ। परेशान तीर्थयात्री अब पाकिस्तानी अधिकारियों से अपील कर रहे हैं कि उन्हें वाघा-अटारी बॉर्डर से भारत में प्रवेश करने की अनुमति देकर उनकी तीर्थयात्रा को आसान बनाया जाए। उनके लिए, यह सिर्फ़ यात्रा में रुकावट नहीं है, बल्कि लंबे समय से प्रतीक्षित धार्मिक तीर्थयात्रा में एक बाधा है। श्रद्धालुओं का कहना है कि अगर एनओसी जरूरी थी, तो उन्हें पहले ही इसकी जानकारी क्यों नहीं दी गई और टिकटें क्यों बेची गईं। श्रद्धालुओं का कहना है कि वे पहले वाघा-अटारी बॉर्डर के रास्ते भारत आने वाले थे, लेकिन उन्हें जमीनी रूट से जाने की अनुमति नहीं मिली।
इस फैसले के बाद उन्होंने हवाई मार्ग से भारत पहुंचने की तैयारी की और महंगी टिकटें खरीदीं। श्रद्धालुओं के मुताबिक, उन्हें रात करीब 10 बजे से सुबह 7 बजे तक एयरपोर्ट पर परेशानी झेलनी पड़ी। यात्रा की अनुमति नहीं मिलने के बाद जत्थे के सदस्य एयरपोर्ट पर ही बैठकर पाठ और गुरु साहिब का जाप करते रहे। श्रद्धालुओं ने कहा कि टिकट खरीदने और यात्रा की तैयारी करने के बाद एयरपोर्ट पर रोक दिया जाना उनके लिए बेहद परेशान करने वाला है। उनका दावा है कि टिकट रद्द होने से उन्हें भारी आर्थिक नुकसान भी हुआ है। एयरपोर्ट पर मौजूद एक सिख युवक ने अपना वीजा दिखाते हुए इमीग्रेशन प्रक्रिया पर सवाल उठाया। उसका कहना था कि उनके पास भारत का वीजा मौजूद है और उन्हें अतिरिक्त NOC की जरूरत के बारे में पहले कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। उसने कहा कि अगर कोई सरकारी अनुमति जरूरी थी तो यात्रियों को टिकट खरीदने से पहले इसकी जानकारी दी जानी चाहिए थी। युवक ने राजनीतिक विवाद से धार्मिक यात्रा को अलग रखने की अपील भी की।