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भारत की पहली हाईड्रोजन ट्रेन का पीएम मोदी ने किया उद्घाटन, ये हैं खासियत, देखें वीडियो

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5 से 25 रुपए के बीच रखा गया किराया

जिंदः देश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का उद्धाघटन किया। इस दौरान भारी संख्या में मौजूद लोगों में काफी उत्साह देखने को मिला। इस दौरान हरियाणा के राज्यपाल महामहिम प्रो. असीम कुमार घोष, मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव साथ मौजूद रहे। जींद रेलवे स्टेशन पर जींद और सोनीपत के बीच चलने वाली पहली हाइड्रोजन ट्रेन है। इसके साथ ही हाइड्रोजन फ्यूल से चलने वाली ट्रेन शुरू करने वाला भारत दुनिया का पांचवां देश बन गया है। इससे पहले जर्मनी, फ्रांस, स्वीडन और चीन में ही हाइड्रोजन ट्रेनें चल रही हैं। इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि यह आत्मनिर्भर भारत और सतत विकास की दिशा में एक बहुत बड़ा दिन है। उन्होंने कहा कि आज भारत को पहली हाइड्रोजन ट्रेन मिलने का सपना साकार होने जा रहा है।

यह आत्मनिर्भर भारत और सतत विकास की दिशा में एक बहुत बड़ा दिन है। मैं इससे जुड़े सभी लोगों को बहुत बधाई देता हूं।” दरअसल, 10 कोच वाली यह ट्रेन जींद-सोनीपत रूट पर 14 स्टेशनों के बीच अधिकतम 75 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलेगी। हाइड्रोजन ट्रेन में सफर करना प्‍लेटफॉर्म टिकट से भी सस्‍ता पड़ने वाला है। दरअसल, इसका किराया 5 से 25 रुपए के बीच रखा गया है। ट्रेन 89 किलोमीटर का सफर करीब 2 घंटे में पूरा करेगी। ट्रेन को रवाना करने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जींद में जनसभा को संबोधित करेंगे। इस दौरान वह एलिवेटेड रेलवे ट्रैक, दो मेडिकल कॉलेजों समेत कुल 9 प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन और शिलान्यास भी करेंगे। रेल मंत्रालय की ओर से मिली जानकारी के अनुसार, यह सेवा ट्रेन संख्या 74010 और 74009 के रूप में संचालित होगी। यह ट्रेन न तो बिजली की ओवरहेड लाइन पर निर्भर होगी और न ही डीज़ल इंजन पर होगी।

जींद मुख्यालय में तैनात लोको पायलट (पैसेंजर) राजेश कुमार ने बताया कि भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन के संचालन की जिम्मेदारी मिली है। राजेश कुमार ने बताया कि हाइड्रोजन ट्रेन पूरी तरह नई तकनीक पर आधारित है। इसमें पारंपरिक ट्रेनों की तुलना में अधिक पावर है, यह साउंड प्रूफ है और इससे पर्यावरण में किसी प्रकार का प्रदूषण नहीं होता। इसकी पिक-अप भी काफी बेहतर है, जिससे ट्रेन का संचालन अधिक सुगम और प्रभावी होता है। उन्होंने बताया कि लोको पायलट का यात्रियों से सीधे संवाद नहीं होता। यदि किसी यात्री को सहायता की जरूरत होती है तो लोको पायलट ट्रेन मैनेजर से संपर्क करता है। इसके बाद ट्रेन मैनेजर पब्लिक एड्रेस सिस्टम के जरिए यात्रियों तक सूचना पहुंचाता है और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जाती है।

राजेश कुमार ने बताया कि इस ट्रेन में हाइड्रोजन फ्यूल सेल लगाया गया है। फ्यूल सेल में करीब 8.5 बार के दबाव से हाइड्रोजन गैस भेजी जाती है, जबकि दूसरी ओर से ऑक्सीजन प्रवेश करती है। दोनों के बीच होने वाली रासायनिक प्रक्रिया से बिजली, जलवाष्प (भाप) और पानी उत्पन्न होते हैं। बिजली ट्रेन को चलाने का काम करती है, जलवाष्प वातावरण में निकल जाती है और पानी नीचे निकल जाता है। यही वजह है कि हाइड्रोजन ट्रेन को पर्यावरण के अनुकूल और शून्य-उत्सर्जन (Zero Emission) तकनीक वाली ट्रेन माना जाता है।

ट्रेन संख्या 74010 सुबह 7:40 बजे जींद से रवाना होगी और 9:40 बजे सोनीपत पहुंचेगी। इसी तरह ट्रेन संख्या 74009 10:40 बजे सोनीपत से रवाना होगी और दोपहर 1:00 बजे जींद पहुंचेगी। हाइड्रोजन फ्यूल ट्रेन जींद सिटी, पांडू पिंडारा, ललित खेड़ा, भांपेगा, ईशापुर खेड़ी, बुटाना, खांडराई, गोहाना, राबड़ा, लाठ, मोहाना और बरवासनी स्टेशनों पर रुकेगी। इस तरह यह ट्रेन दिन में दो फेरे लगाएगी और हर रोज़ कुल क़रीब 356 किलोमीटर की दूरी तय करेगी। हाइड्रोजन ईंधन से चलने वाली ट्रेन में एक समय में कुल 682 यात्री सफर कर सकेंगे। भारतीय रेलवे के अनुसार, हाइड्रोजन ट्रेन में विशेष फ्यूल-सेल तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है।

इस तकनीक में हाइड्रोजन गैस की मदद से रासायनिक प्रक्रिया के जरिए बिजली उत्पन्न की जाती है, जिससे ट्रेन संचालित होती है। जहां डीज़ल इंजन काला धुआं छोड़ते हैं, वहीं हाइड्रोजन इंजन से केवल पानी की भाप निकलती है। अन्य पारंपरिक इंजनों की तुलना में हाइड्रोजन इंजन प्रदूषण नहीं फैलाता। रेलवे के अनुसार, इन ट्रेनों में हाइड्रोजन भरने के लिए जींद में ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन संयंत्र स्थापित किया गया है। यहां पानी को इलेक्ट्रोलिसिस प्रक्रिया के माध्यम से हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में विभाजित किया जाता है। इसके बाद तैयार हाइड्रोजन को उच्च दबाव वाले टैंकों में जमा किया जाता है और वहीं बनाए गए विशेष फ्यूलिंग साइडिंग/स्टेशन पर ट्रेन में भरा जाता है। इसके लिए सामान्य रेलवे स्टेशनों पर अलग से फ्यूल स्टेशन नहीं बनाए गए हैं। पायलट परियोजना के तहत जींद में ही यह विशेष सुविधा विकसित की गई है।

 

 

 

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