नई दिल्ली: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) अब गगनयान मिशन के आगे की तैयारी में बड़ा कदम उठाने वाले हैं। ISRO के अंतरिक्ष यात्री चयन और प्रबंधन समिति ने सिफारिश की है कि दूसरे बैच में 4 आम नागरिकों (सिविलियंस) को भी शामिल किया जाए। ये नागरिक विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित के एक्सपर्ट्स होंगे।
उनके साथ 6 मिशन पायलट भारतीय वायुसेना की सैन्य पृष्ठभूमि से लिए जाएंगे। इस फैसले से यह साफ है कि ISRO अब सिर्फ टेक्नोलॉजी साबित करने से आगे बढ़कर नियमित अंतरिक्ष मिशनों, वैज्ञानिक काम और भविष्य के अंतरिक्ष स्टेशन के लिए मजबूत अंतरिक्ष यात्री दल तैयार कर रहा है। पहला बैच में चारों अंतरिक्ष यात्री एयर कमोडोर प्रशांत नायर, ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला, अजित कृष्णन और अंगद प्रताप थे। ये सभी फाइटर प्लेन पायलट और टेस्ट पायलट थे। अब दूसरे बैच में बदलाव आ रहा है। इसमें 6 मिशन पायलट सैन्य एविएशन बैकग्राउंड से होंगे जिनमें फाइटर पायलटों के अलावा भारतीय वायुसेना के कॉम्बैट हेलिकॉप्टर पायलट भी शामिल किए जा सकते हैं।
समिति ने कुल 10 अंतरिक्ष यात्रियों का पूल बनाने का की सिफारिश की है जिसमें 4 सिविलियन Stem एक्सपर्ट्स होंगे हालांकि इन सिविलियंस को गगनयान के शुरुआती मिशनों में नहीं भेजा जाएगा। वे चौथे क्रूड गगनयान मिशन से ही अंतरिक्ष में उड़ान भर सकेंगे। दुनिया भर में भी यही तरीका अपनाया जाता है। पहले सैन्य प्रशिक्षित पायलटों को भेजा जाता है जब तक टेक्नोलॉजी पूरी तरह सही और सुरक्षित न हो जाए। यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि ISRO अब गगनयान को सिर्फ एक या दो मिशन तक सीमित नहीं रखना चाहता है। भविष्य में साल में दो मानवयुक्त मिशन करने की योजना है। अंतरिक्ष यात्री एक मिशन से लौटने के दो साल बाद फिर उड़ान भर सकते हैं।
चुनौतियां भी हैं
अंतरिक्ष यात्री चयन की प्रक्रिया सही दिशा में बढ़ रही है लेकिन ISRO को कुछ क्षेत्रों में अभी काफी करना बाकी है। फिलहाल ISRO के पास सिर्फ एक अस्थाई अंतरिक्ष यात्री ट्रेनिंग सेंटर है। पूर्ण सुविधाओं वाला स्थाई प्रशिक्षण केंद्र अभी बनना बाकी है। टेक्नोलॉजी के मामले में भी चुनौतियों है। खासतौर पर ECLSS अभी पूरी तरह विकसित नहीं हुआ है। यह सिस्टम बिना अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष में भेजा नहीं जा सकता क्योंकि यह ऑक्सीजन, तापमान, दबाव और अन्य जरुरी चीजों को नियंत्रित करता है।
सिविलियंस को अंतरिक्ष यात्री बनने का रास्ता खोलना isro की सोच में बड़े बदलाव को दिखाता है। पहले बैच में सिर्फ सैन्य पायलटों से शुरु करके अब Stem विशेषज्ञों को शामिल करना भारत को नियमित मानव अंतरिक्ष उड़ानों और भविष्य के अंतरिक्ष स्टेशन के लिए तैयार कर रहा है। यह कदम भारत को अंतरिक्ष में एक स्थाई उपस्थिति बनाने की दिशा में मजबूत बनाएगा। बशर्ते ट्रेनिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और जरुरी टेक्नोलॉजी को भी तेजी से विकसित किया जाए।
