ऊना/सुशील पंडित: भाजपा की तरह कांग्रेस पार्टी शगूफे नहीं छोड़ती। प्रदेश की मौजूदा सुक्खू सरकार धरातल पर काम कर लोकप्रियता हासिल कर रही है। यह बात ऊना ब्लॉक महिला कांग्रेस अध्यक्ष सीमा शर्मा ने कही। उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनावों को निकट आते देख संगठनात्मक मजबूरियों के चलते भाजपा नेत्रियां फील्डिंग का असफल प्रयास कर रही हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा नेत्रियों को स्मरण रहे कि हालही में सुक्खू सरकार ने बेटी के पैदा होने पर 2 लाख रुपए देने की घोषणा की है। इसके अतिरिक्त प्रदेश में करीब 6500 अनाथ बच्चों को स्पेशल चाइल्ड ऑफ द स्टेट का दर्जा दे कर उनको मासिक जेब खर्च के लिए 4000 रूपए, फ्री शिक्षा का देने और शादी पर 2 लाख रुपए देने की भी घोषणा की है।
इसके अतिरिक्त इन बच्चों को मकान बनाने के लिए धन उपलब्ध करवाने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सत्ता संभालने के बाद सुक्खू सरकार ने कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित करने ओल्ड पैंशन स्कीम लागू की। उन्होंने कहा कि प्रदेश में आई इतिहासिक आपदा के बाबजूद शड्यूल टराइव जिलों में महिलाओं को 1500 रूपए बतौर महिला सम्मान निधि के रूप में शुरू कर दिए है। उन्होंने कहा कि भाजपा नेत्रियां अपने शीर्ष नेताओं और तीन सांसदों से पूछे कि वो आपदा के दौरान घरों दुबक कर क्यों बैठे रहे। प्रदेश को आपदा से उभारने के लिए केंद्र सरकार के पास क्यों नहीं धरने पर बैठे। उन्होंने कहा कि बतौर महिला होने के नाते भाजपा नेत्रियों से मुझे सहानुभूति है। इसलिए मेरा उन्हें मशवरा है कि जब भी महिलाओं के साथ गलत हो तो वो अपनी आवाज बुलन्द करें।
क्योंकि जब एक दिल्ली में एक तरफ नए संसद भवन का उद्घाटन किया जा रहा था तो दूसरी तरफ केंद्र की सरकार के इशारे पर पहलवान बेटियां पर लाठियां भांजी गई और सड़कों पर घसीटा गया तब भाजपा नेत्रियां संगठनात्मक मजबूरी में चुप रही। वहीं सांसद भवन के उद्घाटन समारोह में देश के शीर्ष पर बैठी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को नजरंदाज करना क्या नारी वर्ग का अपमान नहीं है। उन्होंने कहा कि भाजपा नेत्रियां बताएं भाजपा विधायक की पत्नी द्वारा सोशल मीडिया पर रो-रो यह कहना कि वो घरेलू हिंसा करता है। इसके अतिरिक्त कुल्लू के भाजपा नेता नेत्री की वीडियो बायलर हुआ था। तब भाजपा महिला मोर्चा की नेत्रियों चुप क्यों रही। उन्होंने कहा कि भाजपा महिला मोर्चा की नेत्रियों को मेरी राय है कि वो संगठन में बिना दबाव के काम करें और सही मायने में महिलाओं के हक की लड़ाई लड़ें।
