जालंधर, ENS: नगर निगम के कर्मी को पीटने को लेकर भारी हंगामा हो गया। दरअसल, पीड़ित ने आरोप लगाए है कि वार्ड नंबर 20 के पार्षद मनमोहन सिंह राजू के बेटे शुभम ने उस पर हमला कर दिया। जिसके बाद पीड़ित द्वारा भारत नगर मार्केट में स्थित पार्षद के दफ्तर के बाहर प्रदर्शन किया गया। वहीं दूसरी ओर इस मामले को लेकर पार्षद मनमोहन ने कहा कि उस पर मारपीट के लगाए जा रहे आरोप बेबुनियाद है। उन्होंने सीसीटीवी जारी करते हुए कहा कि कर्मी ने खुद ही अपने कपड़े फाड़े है और मुझ पर मारपीट के आरोप लगा रहा है।
पीड़ित रोहित ने कहा कि वह कच्चा कर्मी है और उसके दो साथी मौजूद थे। पीड़ित का कहना है कि वह कप्लेंट को लेकर दफ्तर गए थे, जहां उसके साथ पार्षद और बेटे ने मारपीट की। आरोप है कि कुछ दिन पहले वह छुट्टियां करके धार्मिक स्थल पर गया हुआ था। पीड़ित का आरोप है कि छुट्टियों की रंजिश पार्षद ने निकाली और दफ्तर बुलाकर उसके बेटे शुभम ने उस पर हमला कर दिया। आरोप है कि शुभम ने उसकी बेरहमी से पिटाई की और उसके कपड़े फाड़ दिए। वहीं कर्मियों ने कहाकि वह अभी समझौता नहीं करेंगे। मामले की जांच और पार्षद के बेटे से पूछताछ के बाद ही आगे का फैसला किया जाएगा।
दूसरी ओर मामले को लेकर पार्षद राजू ने कहा कि उसके बाद घटना स्थल की सीसीटीवी फुटेज मौजूद है। सीसीटीवी फुटेज में देखा जा सकता है कि नगर निगम के कर्मी ने खुद अपने कपड़े फाड़े है और हंगामा करना शुरू कर दिया गया। पार्षद का कहना है कि दोनों में सिर्फ बहसबाजी हुई थी। जिसके बाद उसने मारपीट के झूठे आरोप मेरे और मेरे बेटे पर लगाए। पार्षद के बेटे शुभम ने बताया कि कमल विहार हलके में काफी समय से गंदा पानी आ रहा था। ऐसे में उसने रोहित को फोन किया था और कहा कि पक्का मुलाजिम जोगिंदर अकेला काम कर रहा है और वह बुजुर्ग है। ऐसे में वह उसके साथ आकर काम करवा दे।
शुभम का आरोप है कि रोहित ने आते ही जोगिंदरपाल (ताया) को गालियां निकालनी शुरू कर दी। जिसके बाद उसने उसे गालियां निकालने से रोका। रोहित ने कहा कि ताया ही उसे उंगली लगाता है और खुद काम नहीं करता। जिसके बाद उसने रोहित को दफ्तर से इसलिए भेज दिया कि दफ्तर में महिलाएं भी आती है। ऐसे में रोहित दफ्तर से सही सलामत गया, जिसकी सीसीटीवी फुटेज भी उसके पास मौजूद है। इस दौरान पता नहीं उसके बाद उसने खुद कपड़े फाड़ लिए और उस पर मारपीट के आरोप लगाए। शुभम ने कहा कि अगर उसने पिटाई की है तो उसके दफ्तर से जाते से समय कपड़े फटे होने थे, लेकिन ऐसा कुछ नहीं है।
