चंडीगढ़ः वैश्विक तनाव का असर एलपीजी, डीजल-पेट्रोल के बाद अब खाद्य तेलों की कीमतों पर पड़ गया। पेट्रोल-डीजल की बढ़ी कीमतों की वजह से परिवहन लागत में बढ़ोतरी हुई है, जिसकी वजह से अब सरसों तेल समेत अन्य खाद्य तेलों के दाम भी बढ़ गए हैं। बढ़ती कीमतों से आम आदमी की रसोई का बजट भी प्रभावित हो रहा है।बढ़ती कीमतों से गृहणियों की रसोई का बजट प्रभावित हो रहा है तथा लोगों को खर्च में कटौती करनी पड़ रही है। बाजार में अभी तक 175 रुपये प्रति लीटर बिकने वाला कंपनी पैक्ड सरसों तेल 185 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया है।
पिछले सप्ताह की तुलना में खाद्य तेलों की कीमतों में 15 रुपये प्रति लीटर तक की वृद्धि दर्ज की गई है। तेल के दाम बढ़ने से आम परिवारों की मासिक रसोई लागत बढ़ गई है। व्यापारियों के अनुसार परिवहन भाड़े में वृद्धि का असर खाद्य तेलों के दाम पर पड़ा है। व्यापारी संदेश गुप्ता ने बताया कि रिफाइंड तेल 130 रुपये से बढ़कर 140 रुपये प्रति लीटर तथा तिल का तेल 150 रुपये से बढ़कर 165 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। उनका कहना है कि लागत बढ़ने के कारण बाजार में कीमतों पर दबाव बना हुआ है।
खाद्य तेल महंगे होने के बाद गृहणियां अब तेल के उपयोग में किफायत बरतने लगी हैं। लोगों का मानना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो अन्य खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है। मिडिल-ईस्ट में तनाव और बढ़ते गैस-तेल संकट की वजह से देश के घरेलू बाजार में कई वस्तुओं के मूल्य में वृद्धि हुई है। परिवहन लागत बढ़ने की वजह से ड्राई फ्रूट्स, आटा, सरसों का तेल, रिफाइंड, डालडा, दाल, आटा, नमकीन, मसाले, खड़े मसाले सहित कई खाद्य-पदार्थों और खाना बनाने में जरूरी वस्तुओं का मूल्य बढ़ चुका है। विशेषज्ञों के अनुसार, महंगाई बढ़ने से एक परिवार का लगभग दो से पांच हजार का अतिरिक्त खर्चा बढ़ गया है।

