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वैश्विक प्रतिस्पर्धा में डटे हरियाणा के विश्वविद्यालय

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चंडीगढ़ : हरियाणा के सरकारी विश्वविद्यालय शैक्षणिक उत्कृष्टता, रोजगारपरक शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के मामले में बड़े बदलावों की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। रासाथ ही, राज्य सरकार हर जिले में एक-एक मॉडल संस्कृति कॉलेज स्थापित करने की योजना पर भी कार्य कर रही है। ये 22 मॉडल संस्कृति कॉलेज स्वायत्त बहुविषयक उत्कृष्टता केंद्रों के रूप में विकसित किए जाएंगे। इसके साथ ही क्षेत्रीय मेगा एजुकेशनल हब स्थापित कर सहयोगात्मक अनुसंधान और शैक्षणिक उत्कृष्टता को प्रोत्साहित किया जाएगा। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में आज यहां एक उच्च स्तरीय बैठक में राज्य सरकार द्वारा इस दिशा में शुरू किए गए सुधारों की प्रगति की समीक्षा की गई।

बैठक में 5वें राष्ट्रीय मुख्य सचिव सम्मेलन की सिफारिशों पर की गई कार्रवाई की समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव ने उच्च शिक्षा एवं तकनीकी शिक्षा विभाग को सभी सुधारात्मक पहलों को निर्धारित समय सीमा में लागू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश के विश्वविद्यालयों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप वैश्विक स्तर के शिक्षण, अनुसंधान, नवाचार और कौशल विकास केंद्रों के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने उच्च शिक्षा एवं तकनीकी शिक्षा विभागों को निर्देश दिए कि सुधारों की गति को बनाए रखते हुए सभी पहलों का समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश के विश्वविद्यालयों का राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 तथा भविष्य की आर्थिक एवं तकनीकी आवश्यकताओं के अनुरूप वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी शिक्षण, अनुसंधान, नवाचार एवं कौशल विकास के केंद्रों के रूप में विकास होना चाहिए।

राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों ने भारतीय मूल के प्रतिष्ठित शिक्षाविदों और शोधकर्ताओं को आकर्षित करने के लिए पहल की है। महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू), रोहतक ने ग्लोबल टैलेंट रिटर्न स्कीम के लिए एक समिति का गठन किया है, जबकि गुरुग्राम विश्वविद्यालय वैश्विक पूर्व छात्र (एलुमनाई) डेटाबेस विकसित कर रहा है तथा आईजीयू रेवाड़ी ने वैश्विक शिक्षाविदों को आकर्षित करने के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने का प्रस्ताव दिया है। शैक्षणिक संस्थानों और उद्योगों के बीच सहयोग को मजबूत करने के लिए विश्वविद्यालयों में उद्योग विशेषज्ञों को ‘प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस’ के रूप में नियुक्त किया जा रहा है। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय ने दो उद्योग विशेषज्ञों को नियुक्त किया है, जबकि सीबीएलयू भिवानी ने चार और गुरुग्राम विश्वविद्यालय ने तीन विशेषज्ञों को पैनल में शामिल किया है। कई विश्वविद्यालय 2026-27 शैक्षणिक सत्र से ऐसी नियुक्तियों का विस्तार करने की योजना बना रहे हैं।

राज्य सरकार समन्वित भर्ती रणनीति के माध्यम से शिक्षकों की कमी को दूर करने की दिशा में भी कार्य कर रही है। विश्वविद्यालयों में शिक्षकों के रिक्त पदों की रियल टाइम मॉनिटरिंग के लिए कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के सहयोग से एक डिजिटल डैशबोर्ड विकसित किया जा रहा है। उभरती प्रौद्योगिकियों और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप शिक्षा को ढालने के लिए पाठ्यक्रमों में व्यापक सुधार किए जा रहे हैं। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय ने अपने शैक्षणिक कार्यक्रमों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, ब्लॉकचेन तथा डेटा एनालिटिक्स को शामिल किया है, जबकि सीबीएलयू ने एआई, ड्रोन टेक्नोलॉजी, जियो-इन्फॉर्मेटिक्स तथा साइबर सुरक्षा जैसे पाठ्यक्रम शुरू किए हैं। आईजीयू रेवाड़ी ने एनईपी 2020 को पूर्ण रूप से लागू करते हुए भारतीय ज्ञान परंपरा, सतत विकास और नैतिकता को अपने पाठ्यक्रमों में शामिल किया है।

विश्वविद्यालय वैकल्पिक वित्तीय संसाधनों और उद्योग साझेदारी को भी मजबूत कर रहे हैं। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय ने लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम मॉडल के अंतर्गत 23 ऑनलाइन कार्यक्रम शुरू किए हैं, जिनमें लगभग 10,000 विद्यार्थी अध्ययन कर रहे हैं, जबकि उसके एलुमनाई एसोसिएशन ने शैक्षणिक विकास के लिए लगभग 1.7 करोड़ रुपये जुटाए हैं। गुरुग्राम विश्वविद्यालय ने कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) के तहत सहयोग प्राप्त किया है तथा कई शैक्षणिक साझेदारियां की हैं। राज्य की ‘अर्न व्हाइल लर्न’ पहल का भी लगातार विस्तार हो रहा है, जिससे वर्ष 2024-25 के दौरान लगभग 7,000 विद्यार्थियों को लाभ मिला है। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय वर्तमान में चार अप्रेंटिसशिप एम्बेडेड डिग्री प्रोग्राम चला रहा है और सात नए कार्यक्रम प्रस्तावित  हैं, जबकि आईजीयू रेवाड़ी ने रोजगार क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में छह माह की अनिवार्य अप्रेंटिसशिप शुरू की है।

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