गोरखपुरः क्रॉस मॉल रोड स्थित सान्वी ज्वेलर्स शोरूम में 45 लाख के सोने और हीरे के आभूषणों की चोरी के मामले में पुलिस ने चौकाने वाला खुलासा किया है। इस मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दुकान में कार्यरत 2 महिला सेल्सकर्मियों को गिरफ्तार किया गया। आरोपियों की पहचान राजघाट के हसनगंज, लालडिग्गनी की मुस्कान गुप्ता और कुशीनगर के कसया थाना क्षेत्र के शक्तिनगर की जगमा खातून के रूप में हुई। मामले का खुलासा उस समय हुआ जब सान्वी ज्वेलर्स के मालिक राजेश कुमार बलानी ने मार्च 2026 में वार्षिक स्टॉक ऑडिट कराया।
ऑडिट के दौरान कई आभूषण संदिग्ध पाए गए। कैरेटोमीटर से जांच में उनकी शुद्धता शून्य निकली, जबकि कुछ सोने के गहनों का वजन भी कम मिला। विस्तृत जांच में पता चला कि कई आभूषणों के लटकन गायब थे और उनकी जगह नकली सामग्री रखी गई थी। पुलिस की पूछताछ में दोनों लड़कियों ने बताया कि हाई-फाई शौक पूरा करने के लिए ज्वेलरी की दुकान से हार चोरी कर नेपाल में बेच देते थे। उसी पैसे से अपना शौक पूरा करते थे। पुलिस के मुताबिक, लड़कियां ब्रांडेड कपड़े, एप्पल का मोबाइल और लक्जरी जिंदगी जी रही थीं। जबकि बहुत ही सामान्य परिवार से ताल्लुक रखती हैं।
पुलिस ने उनके पास से 9.50 लाख रुपये नकद और लगभग 25.50 लाख रुपये मूल्य के चोरी किए गए आभूषण भी बरामद किए हैं। पुलिस के मुताबिक, दोनों आरोपी स्ट्रांग रूम में रखे सोने और हीरे के कीमती आभूषणों को निकाल लेती थीं और उनकी जगह बिल्कुल उसी डिजाइन के नकली गहने रख देती थीं। इस वजह से लंबे समय तक चोरी का पता नहीं चल सका। चूड़ियां, अंगूठियां, कान के टॉप्स और झुमकों समेत कई महंगे आभूषण इस तरीके से बदले गए। इतना ही नहीं, जिन गहनों में अधिक संख्या में लटकन लगे होते थे, उनमें से एक-दो लटकन तोड़कर भी चोरी कर लिए जाते थे, ताकि पहली नजर में कोई अंतर दिखाई न दे।
आरोपियों ने बताया कि वह चोरी के गहनों को नेपाल में बेचकर उससे नया गहना खरीद लेती थीं। आरोपियों को पुलिस ने कोर्ट में पेश किया, जहां से जेल भेजा गया। पुलिस के मुताबिक, मुस्कान पिछले 7 साल और नगमा करीब ढाई वर्षों से सान्वी ज्वेलर्स में सेल्समैन के पद पर काम करती थीं। जांच में सामने आया कि दोनों युवती ने नौकरी के दौरान दुकान की सुरक्षा व्यवस्था और सीसीटीवी कैमरों की निगरानी रेंज को जान गई थीं। उन्हें यह अच्छी तरह मालूम था कि शोरूम और स्ट्रांग रूम के किन हिस्सों में कैमरों की सीधी निगरानी नहीं रहती। इसी का फायदा उठाकर वे चोरी की वारदातों को अंजाम देती थीं।
