नई दिल्ली: सोशल मीडिया से बनी कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की इस समय मार्केट में खूब सुर्खियों में है। इसी बीच एक नई पार्टी लॉंच हुई है। जिसकी सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज मार्कण्डेय काटजू ने की है। इस पार्टी का ऐलान करते हुए पूर्व जज ने पार्टी का नाम IKP यानि इश्क करो पार्टी रखा है। पार्टी का ऐलान करने के बाद उन्होंने सभी लोगों को पार्टी की सदस्यता ग्रहण करने की अपील की।
The proof that Abhijit Dipke is an idiot is clear from the fact that one of his principal demands is for the resignation of Dharmendra Pradhan, India’s Education Minister.
But if he resigns he will only be replaced by another Minister. Then what difference will it make ?— Markandey Katju (@mkatju) June 7, 2026
पूर्व जज ने सोशल मीडिया पर जानकारी शेयर करते हुए इस मुहिम से जुड़ने की अपील की है। उन्होंने लिखा- जो भी लोग इससे जुड़ना चाहते हैं, वे इसकी ऑफिशियल ईमेल आईडी ishqkaroparty@gmail.com पर संपर्क कर सकते हैं।
ये पार्टी देश की गंभीर समस्याओं से निपटने के लिये काम करेगी
मार्कण्डेय ने साफ किया कि कई लोग इसे मजाक या सिर्फ लड़के-लड़कियों के बीच प्रेम संबंधों को बढ़ावा देने वाली ‘वैलेंटाइन डे’ जैसी पहल समझ रहे हैं, लेकिन ऐसा सोचना बिल्कुल गलत है। यह देश की गंभीर समस्याओं से निपटने का एक बड़ा प्रयास है।
देश में फैली गरीबी, बेरोजगारी, बच्चों में कुपोषण, महंगी शिक्षा, खराब स्वास्थ्य सेवाएं और महंगाई जैसी समस्याओं को बिना जनता की एकता के दूर नहीं किया जा सकता। काटजू के अनुसार, आज हमारा समाज जाति और धर्म के नाम पर बंटा हुआ है।
वोट बैंक के लिए इस नफरत को बढ़ावा देते हैं राजनेता
राजनेता अपने फायदे और वोट बैंक के लिए इस नफरत को बढ़ावा देते हैं। ‘इश्क करो पार्टी’ का मकसद इसी नफरत को खत्म करके लोगों में प्यार और एकता को बढ़ावा देना है।
‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के फाउंडर अभिजीत पर साधा निशाना
काटजू ने सोशल मीडिया पर करते हुए ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के फाउंडर अभिजीत दीपके पर तंज कसा। दरअसल, देश की प्रतियोगी परीक्षाओं में हुई गड़बड़ी के खिलाफ अभिजीत दीपके ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक बड़ा प्रदर्शन किया था। इस दौरान शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की थी।
इस पर निशाना साधते हुए काटजू ने कहा कि अभिजीत दीपके के मूर्ख होने का प्रमाण इस बात से स्पष्ट है कि उनकी प्रमुख मांगों में से एक भारत के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा है। लेकिन अगर वे इस्तीफा दे भी देते हैं तो उनकी जगह कोई दूसरा मंत्री नियुक्त हो जाएगा। फिर इससे क्या फर्क पड़ेगा?
