नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक ( आरबीआई ) ने पेटीएम पेमेंट्स बैंक को बड़ा झटका दिया। आरबीआई ने बैंकिंग लाइसेंस रद्द कर दिया। यह कदम एक रेगुलेटरी प्रक्रिया का औपचारिक अंत है। बताया जा रहा हैकि पिछले 2 सालों में इस संस्था को पहले ही काफी हद तक इनैक्टिव कर दिया था। हालांकि, कागजों पर यह कदम काफी अहम लगता है। लेकिन, पेटीएम के कामकाज और ग्राहकों पर इसका असल असर सीमित रहने की उम्मीद है। आरबीआई ने आधिकारिक बयान में कहा कि अब पेटीएम पेमेंट बैंक बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट के तहत किसी भी तरह का बैंकिंग काम नहीं कर सकेगा। इसका मतलब है कि बैंक अब नए या पुराने ग्राहकों के लिए सामान्य बैंकिंग सेवाएं नहीं दे पाएगा। केंद्रीय बैंक के अनुसार, पेटीएम पेमेंट बैंक का कामकाज और मैनेजमेंट आम जनता के हित में नहीं था।
साथ ही बैंक ने अपने पेमेंट्स बैंक लाइसेंस से जुड़ी कई शर्तों का सही तरीके से पालन नहीं किया। आरबीआई पहले भी इस बैंक पर सख्त कार्रवाई कर चुका था। 11 मार्च 2022 से बैंक को नए ग्राहक जोड़ने से रोक दिया गया था। इसके बाद बैंक पर कई तरह की पाबंदियां लगाई गईं, जैसे खातों में पैसे जमा करना, क्रेडिट करना और वॉलेट में टॉप-अप करने पर भी रोक लगाई गई थी। अब लाइसेंस रद्द होने के बाद पेटीएम पेमेंट बैंक का भविष्य पूरी तरह से अनिश्चित हो गया है और ग्राहकों पर भी इसका असर पड़ सकता है। दरअसल, 2024 की पाबंदियों के बाद कंपनी ने पहले ही अपने इकोसिस्टम को इस तरह से दोबारा बनाया था कि वह अपनी बैंकिंग शाखा से अलग होकर काम कर सके।
नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) ने पेटीएम को एक थर्ड-पार्टी एप्लिकेशन प्रोवाइडर के तौर पर मंजूरी दे दी थी। इसका मकसद यह था कि वह पार्टनर बैंकों के जरिए यूपीआई सेवाएं जारी रख सके। उसका यूपीआई हैंडल एक मल्टी-बैंक फ्रेमवर्क में बदल दिया गया। इसकी अगुवाई यस बैंक कर रहा था। जबकि मर्चेंट सेटलमेंट और पेमेंट का लेन-देन बाहरी बैंकिंग पार्टनर के जरिए होने लगा। इसके अलावा, रेगुलेटरी मंजूरियों ने पेटीएम को बैंक-आधारित मॉडल के बजाय एक पेमेंट्स डिस्ट्रिब्यूशन प्लेटफॉर्म के तौर पर बदलने में और मजबूती दी है। मसलन, अक्टूबर 2024 में नए यूपीआई यूजर्स को जोड़ना और नवंबर 2025 में पेमेंट एग्रीगेटर लाइसेंस हासिल करना। नतीजतन, बैंक के बंद होने के बावजूद पेटीएम की मुख्य पेमेंट सेवाएं सामान्य रूप से काम करती रहेंगी।
