चंडीगढ़: हरियाणा सरकार ने राज्य के कृषि और बागवानी क्षेत्र से जुड़े किसानों और व्यवसायियों के हित में एक और ऐतिहासिक तथा अनूठी पहल की है। प्रदेश सरकार ने अब “मधुमक्खी पालन” को “मुख्यमंत्री बागवानी बीमा योजना” के दायरे में शामिल कर लिया है, जिससे इस व्यवसाय से जुड़े पालकों को बड़ी वित्तीय सुरक्षा और राहत मिलने का मार्ग प्रशस्त हो गया है।
इस महत्वपूर्ण निर्णय की जानकारी देते हुए कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री श्याम सिंह राणा ने कहा कि सरकार की इस नीति से मधुमक्खी पालन का व्यवसाय करने वाले उद्यमियों और किसानों के मन से प्राकृतिक आपदाओं और अनहोनी के कारण होने वाले नुकसान की चिंता काफी हद तक कम हो जाएगी। उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत बाढ़ की स्थिति में मधुमक्खी के बक्से और कॉलोनियों के पानी में डूब जाने, आग लगने से उनके नष्ट होने, तथा ट्रांसपोर्टेशन (परिवहन) के दौरान दुर्घटना के कारण होने वाले नुकसान को कवर किया जाएगा, बशर्ते यह दुर्घटना हरियाणा राज्य के भीतर हुई हो और इसकी आधिकारिक एफआईआर (FIR) या डीडीआर (DDR) दर्ज कराई गई हो।
इसके अलावा, मधुमक्खियों में किसी प्रकार की महामारी के कारण होने वाले नुकसान की स्थिति में भी मुआवजा दिए जाने का प्रावधान किया गया है। योजना की रूपरेखा और पात्रता स्पष्ट करते हुए कृषि मंत्री ने बताया कि इस बीमा का लाभ उठाने के लिए प्रति मधुमक्खी पालक अधिकतम 250 मधुमक्खी कॉलोनियां और बक्से निर्धारित किए गए हैं। इसके साथ ही, ‘भावांतर भरपाई योजना-शहद’ के तहत पंजीकरण करवाना अनिवार्य होगा तथा मधुमक्खी पालक को हर बॉक्स पर भावांतर भरपाई योजना यूनिट नंबर देना भी आवश्यक किया गया है।