अमृतसरः शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबधंक समिति (SGPC) के सचिव बलविंदर सिंह कहलवां ने बताया कि बंदी छोड़ दिवस गुरु हरगोबिंद साहिब जी से जुड़ा है। जिसको सिख समुदाय में दिवाली के त्योहार के साथ ही सचखंड श्री हरिमंदिर साहिब और श्री अकाल तख्त साहिब में बहुत श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि SGPC ने पंजाब, देश के अन्य हिस्सों और विदेशों से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए विशेष प्रबंध किए हैं, जिनमें ठहरने की व्यवस्था (सराय), सामुदायिक रसोई (लंगर), वाहन पार्किंग और अन्य आवश्यक सुविधाएं शामिल हैं।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के बारे में बात करते बताया कि गुरु हरगोबिंद साहिब जी को बिना किसी ठोस कारण के ग्वालियर के किले में कैद कर दिया गया था। प्रभात फेरियों की परंपरा का पालन करते बाबा बुड्ढा साहिब जी रोजाना अमृतसर से ग्वालियर तक जाते थे और रास्ते में शब्द कीर्तन करते थे।
किले के पास पहुंचकर जहां गुरु जी को कैद रखा गया था, वे किले की परिक्रमा करते थे और फिर वापस लौट आते थे। भारी दबाव और संगत की मांगों के आगे झुकते मुगल शासन को गुरु जी को रिहा करने का निर्णय लेना पड़ा। हालांकि, गुरु साहिब ने तब तक बाहर आने से इनकार कर दिया, जब तक कि उनके साथ कैद किए 52 राजाओं को भी रिहा नहीं कर दिया जाता।
उन्होंने उन सभी 52 राजाओं की रिहाई सुनिश्चित कराई, जिसके कारण उन्हें बंदी छोड़ दाता की उपाधि मिली। सचिव कहलवान ने बताया कि संध्याकालीन प्रार्थना के पाठ के बाद, एक भव्य दीपमाला का आयोजन किया जाएगा, जिसके साथ आतिशबाजी भी होगी। इसके अलावा कल शाम श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार द्वारा सिख समुदाय के नाम एक संदेश जारी किया जाएगा। उन्होंने पूरी सिख संगत से आग्रह किया है कि वे अपने परिवारों के साथ आएं, धन गुरु हरगोबिंद साहिब जी के चरणों में नतमस्तक हों और अपना जीवन सफल बनाएं।
