जालंधर, ENS: देश भर में भगवान महर्षि वाल्मीकि जी का जन्म दिवस आज अत्यंत धूमधाम, श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। वहीं जालंधर सहित विभिन्न शहरों और मोहल्लों में भगवान महर्षि वाल्मीकि के जीवन और आदर्शों को दर्शाती हुई रंग-बिरंगी और भव्य शोभायात्राएं (शोभा यात्रा) निकाली गई। इसी के साथ आज मंदिरों में हवन यज्ञ किया गया। मामले की जानकारी देते हुए प्रवक्ता ने बताया कि शाम को मंदिर में अटूट लंगर लगाया जाएंगा।
ऐसे में मंदिरों में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए अलग-अलग तरह के पकवान और फल-फ्रूट बांटे जाएंगे। इस पर्व को लेकर प्रवक्ता द्वारा सभी पंजाब वासियों को बधाई दी गई। वहीं मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, कीर्तन और पवित्र हिंदू ग्रंथ रामायण का निरंतर पाठ किया जा रहा है। यह पर्व सामाजिक समानता, करुणा, भक्ति और भगवान महर्षि वाल्मीकि जी की दी हुई महान साहित्यिक एवं आध्यात्मिक शिक्षाओं को याद करने का दिन है।
बता दें कि भगवान महर्षि वाल्मीकि जी रामायण काल के ऋषियों में श्रेष्ठ माने जाते हैं और माता सीता ने लंका से लौटने के बाद उन्हीं के आश्रम में शरण ली थी। उसी आश्रम में प्रभु श्री राम और माता सीता की संतान लव-कुश का जन्म भी हुआ और उन्हें शिक्षा भी भगवान महर्षि वाल्मीकि जी ने ही प्रदान की। रामायण जैसे महाकाव्य की रचना करने वाले भगवान महर्षि वाल्मीकि जी ने रामायण के माध्यम से सत्य, धर्म, त्याग और कर्तव्य परायण होने का पाठ सिखाया।
भगवान महर्षि वाल्मीकि जी संस्कृत साहित्य के सबसे पहले कवि माने जाते हैं और उन्हें समकालीन ऋषि और महान कवि के रूप में पूजा जाता है। भगवान महर्षि वाल्मीकि जी की जयंती पर रामायण का पाठ करना, धार्मिक प्रवचन सुनना, जरूरतमंदों की मदद करना अत्यंत फलदायी माना जाता है और इससे जीवन जीने की प्रेरणा मिलती है। इस प्रकार भगवानमहर्षि वाल्मीकि जी की जयंती अत्यंत शुभ दिवस के रूप में मनाई जाती है। यह दिन ज्ञान प्रदान करने वाले महान शिक्षक को याद करने का एक माध्यम भी है।