नई दिल्लीः भारत ने H-1B वीजा हायरिंग पर अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की बात की कड़े शब्दों में आलोचना की है और उनके दावों को पूरी तरह से बेबुनियाद बताया गया है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि इससे भारतीयों के लिए मौके तो बनते ही है। साथ ही यह अमेरिकी कंपनियों को बेहतरीन टैलेंट, इनोवेशन, रिसर्च, प्रोडक्टिविटी, कॉम्पिटिटिवनेस और नौकरियां पैदा करने में भी मदद करता है, और अमेरिका में शेयर होल्डर्स की संपत्ति भी बढ़ाता है।
जेडी वेंस ने अमेरिकी कंपनियों में काम करने वाले विदेशियों को बंधुआ मजदूर कहा था। वेंस ने अमेरिकी कंपनी माइक्रोसॉफ्ट को सबसे ज्यादा विदेशी बंधुआ मजदूर रखने वाली कंपनी भी बताया था।
विदेश मंत्रालय ने 9 अक्टूबर को जारी अपने बयान में कहा कि भारत अमेरिकी श्रम विभाग के उस फैसले से अवगत है, जो कुछ कंपनियों के लिए स्थायी श्रम प्रमाणन यानी परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन (PERM) कार्यक्रम से संबंधित है। मंत्रालय ने इस मुद्दे पर भारत का रुख स्पष्ट करते कहा कि प्रतिभाशाली पेशेवरों की आवाजाही से भारत और अमेरिका, दोनों की अर्थव्यवस्थाओं को फायदा होता है।
भारत ने कहा किया कि अमेरिका का इतिहास ही विभिन्न पीढ़ियों के प्रवासियों की मेहनत, उद्यमशीलता और इनोवेशन से बना है। ऐसे में भारतीय पेशेवरों के योगदान को नजरअंदाज करना उचित नहीं है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस मामले में अमेरिकी उपराष्ट्रपति की ओर से की टिप्पणियां अनुचित हैं और ऐसी शब्दावली का इस्तेमाल गहरी आपत्ति पैदा करता है, जिसका संबंध दर्दनाक ऐतिहासिक और औपनिवेशिक विरासत से रहा है। भारत ने साफ किया कि वह इस घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है।
उधर, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इस फैसले का बचाव करते आरोप लगाया कि कुछ कंपनियां अमेरिकी कर्मचारियों को नौकरी से निकालकर उनकी जगह विदेशी कर्मचारियों को रख रही हैं। उनके मुताबिक, H-1B वीजा कार्यक्रम का इस्तेमाल कम वेतन पर विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करने के लिए किया जा रहा है।
