ऊना,सुशील पंडित: भारतीय पादप शरीर क्रियाविज्ञान सोसायटी के सहयोग से अटल बिहारी वाजपेयी राजकीय महाविद्यालय बंगाणा, जिला ऊना में आज से पौधों के शरीर क्रियाविज्ञान पर आधारित दो दिवसीय विद्यार्थी कार्यशाला का शुभारंभ किया गया। कार्यशाला का विषय “पौधों को समझना: शरीर क्रियाविज्ञान, आणविक जीव विज्ञान और जैव प्रौद्योगिकी को जोड़ना” है। कार्यशाला का आयोजन 21 एवं 22 सितंबर 2026 को महाविद्यालय के सम्मेलन कक्ष में किया जा रहा है।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को पौधों के शरीर क्रियाविज्ञान, आणविक जीव विज्ञान तथा जैव प्रौद्योगिकी के बीच संबंधों की वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक समझ प्रदान करना है। कार्यशाला के दौरान विद्यार्थियों को पौधों में होने वाली विभिन्न जैविक प्रक्रियाओं, उनके आणविक आधार तथा आधुनिक जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उनके उपयोग से संबंधित महत्वपूर्ण विषयों की जानकारी प्रदान की जा रही है।
इस दो दिवसीय कार्यशाला में अन्य राज्यों से आए विद्यार्थियों सहित कुल 35 विद्यार्थियों ने प्रतिभागी के रूप में भाग लिया। विभिन्न क्षेत्रों से आए विद्यार्थियों की सहभागिता से उन्हें एक-दूसरे के साथ अपने विचार एवं अनुभव साझा करने का अवसर भी प्राप्त हो रहा है।
कार्यशाला में देश के प्रतिष्ठित वैज्ञानिक एवं विषय विशेषज्ञ संसाधन व्यक्तियों के रूप में विद्यार्थियों का मार्गदर्शन कर रहे हैं। इनमें मनोज के. शर्मा, जैव प्रौद्योगिकी विद्यालय, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली प्रमुख रूप से शामिल रहे। विशेषज्ञ द्वारा विद्यार्थियों को पादप शरीर क्रियाविज्ञान, आणविक जीव विज्ञान तथा जैव प्रौद्योगिकी से संबंधित विभिन्न महत्वपूर्ण एवं समकालीन विषयों की जानकारी प्रदान की गई।
इस अवसर पर महाविद्यालय के उप प्राचार्य प्रो. अनिल शर्मा विशेष रूप से उपस्थित रहे। आयोजन टीम में भारतीय पादप शरीर क्रियाविज्ञान सोसायटी (ISPP) के संयुक्त सचिव मनोज के. शर्मा संयोजक, प्रो. नंद लाल एवं डॉ. श्रुति सह-संयोजक तथा संजय के. शर्मा आयोजन सचिव के रूप में उपस्थित रहे।
कार्यशाला के माध्यम से विद्यार्थियों को विषय विशेषज्ञों के साथ सीधे संवाद करने, नवीन वैज्ञानिक अवधारणाओं को समझने तथा पादप विज्ञान एवं जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हो रहे आधुनिक अनुसंधान से परिचित होने का अवसर प्राप्त हो रहा है। विशेषज्ञों द्वारा विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए उन्हें अनुसंधान एवं उच्च शिक्षा के क्षेत्र में उपलब्ध संभावनाओं के बारे में भी जानकारी दी जा रही है।
महाविद्यालय प्रशासन ने कहा कि इस प्रकार की शैक्षणिक कार्यशालाएं विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, अनुसंधान अभिरुचि, नवाचार की भावना तथा उच्च शिक्षा एवं शोध के प्रति रुचि विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। विद्यार्थियों को कक्षा-कक्ष की शिक्षा के साथ-साथ विषय विशेषज्ञों से प्रत्यक्ष रूप से सीखने का अवसर प्रदान करना इस कार्यशाला का महत्वपूर्ण उद्देश्य है।
महाविद्यालय प्रशासन ने यह भी कहा कि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण अकादमिक एवं शोधपरक अवसर उपलब्ध करवाने के लिए भविष्य में भी इस प्रकार के व्याख्यान, कार्यशालाएं, संगोष्ठियां एवं अन्य शैक्षणिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहेंगे।