नई दिल्ली: दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन में 5 मंजिला इमारत ढहने से अब तक 7 लोगों की मौत को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने मामले से जुड़ी याचिका पर संज्ञान लेते हुए तत्काल सुनवाई की। दिल्ली हाई कोर्ट ने एमसीडी को अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले सभी पीजी-हॉस्टल की जांच के निर्देश दिए। कोर्ट ने इस मामले में कार्रवाई की रिपोर्ट भी मांगी है। सत्य निकेतन हादसे के संबंध में दायर याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र, दिल्ली सरकार, एमसीडी, दिल्ली पुलिस, NHRC और डीयू को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि आप जिम्मेदारी से भाग नहीं सकते।
हाईकोर्ट ने इस हादसे को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। अदालत ने अधिकारियों को राहत और बचाव अभियान में तेजी लाने के निर्देश दिए, ताकि मलबे में फंसी जिंदगियों को जल्द से जल्द बचाया जा सके। हाईकोर्ट ने कहा कि 50 छात्रों की जान दांव पर लगी है। कुछ छात्र अभी-भी मलबे के नीचे दबे हैं। इससे ज़्यादा दुखद कुछ नहीं हो सकता। आप ऐसे हादसों को रोकने के लिए क्या कर रहे हैं? इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने हाईकोर्ट को भरोसा दिलाया कि लोगों की जान बचाने के लिए सभी संभव कदम उठाए जा रहे हैं। कोर्ट ने अधिकारियों से रेस्क्यू ऑपरेशन को बढ़ाने और हर संभव तरीके से जीवन बचाने पर जोर दिया।
हाई कोर्ट ने एमसीडी के उच्च अधिकारियों को निर्देश दिया कि वह जांच कर पता लगाएं कि संबंधित बिल्डिंग में जो निर्माण कार्य हो रहा था, उसके लिए इजाजत ली गई थी या नहीं। कोर्ट ने कहा कि अगर नहीं ली गई थी तो उसके लिए संबंधित अधिकारी की भी जिम्मेदारी तय की जाए। हाई कोर्ट ने रिपोर्ट दाखिल कर यह बताने का निर्देश दिया है कि क्या दिल्ली में पीजी फैसेलिटीज को रेगुलेटर करने के लिए कोई नियामक है या नहीं। कोर्ट ने कहा कि नियामक नहीं हैं तो एमसीडी इसे तुरंत बनाए। हाई कोर्ट ने कहा कि इन परिस्थितियों में ऐसे दुर्भाग्यपूर्ण हादसे के लिए प्रथम दृष्टया केवल बिल्डिंग मालिक को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता, संबंधित सभी एजेंसियां बराबर जिम्मेदार हैं।
अदालत ने कहा कि यह आम जानकारी है कि दिल्ली यूनिवर्सिटी अपने बाहरी छात्रों के लिए पर्याप्त रहने की सुविधा नहीं देती है। इसलिए माता-पिता को अपने बच्चों के लिए PG जैसी सुविधाओं का इंतजाम करने के लिए मजबूर होना पड़ता है। हाई कोर्ट ने संबंधित एजेंसियों को निर्देश दिया कि वह अपनी कोशिशों को डबल कर दें, ताकि ऐसे हादसों में मानव जीवन खतरे में न पड़े। अदालत ने इस मामले की अल्प सुनवाई की, लेकिन आदेश डिटेल में लिखाया जा रहा है। एमसीडी की तरफ से दावा किया गया कि रेस्क्यू ऑपरेशन में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी।