नई दिल्ली: लद्दाख में अपनी मांगों को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने केंद्र सरकार को एक साल का अल्टीमेटम दे दिया है। मीडिया के साथ बातचीत करते हुए सरकार को संसद के विंटर सेशन में लद्दाख बिल पेश करके उसे पास करना चाहिए। वांगचुक के अनुसार, इसके बाद अगले एक साल में लद्दाख में अपनी विधानसभा की और अपनी सरकार भी होनी चाहिए। वांगचुक का कहना है कि लद्दाख में सबसे बड़ी परेशान यह हो चुकी है कि विधानसभा के अस्तित्व में आने से पहले ही बड़े प्रशासनिक फैसले लिए गए हैं। उनका कहना है कि पहले लोगों की विधानसभा बनानी चाहिए। उसके बाद बड़े फैसले लेने चाहिए। उनके अनुसार, विधानसभा सर्वोच्च होनी चाहिए। पूरी नौकरशाही उसके अधीन हो। कानून व्यवस्था और वित्तीय शक्तियों से लेकर लद्दाख को कैसे चलाया जाए। यह फैसला नई दिल्ली की चिंता नहीं होनी चाहिए।
लद्दाख को अपनी अर्थव्यवस्था को करना चाहिए मजबूत
सोनम वांगचुक ने लद्दाख के पूर्ण राज्य के दर्ज की मांग पर अपना रुख थोड़ा नरम कर लिया है। उनका कहना है कि पहली कोशिश में सब कुछ नहीं मिल सकता। अगर लद्दाख को अभी तक आर्थिक रुप से आत्मनिर्भर नहीं माना जा रहा। ऐसे में लोकतांत्रिक ढांचा स्वीकार करने के लिए तैयार है जो कि लद्दाख के लिए बनाया गया है। उनका कहना है कि लद्दाख को अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत करना, आत्मनिर्भर बनाने और सीखने के लिए समय देना चाहिए। इसके बाद ही 5 या फिर 10 साल में राज्य का दर्जा हासिल किया जाना चाहिए।
जेन-जी विरोध पर बोले सोनम वांगचुक
जेन-जी प्रदर्शनों को लेकर भी सोनम वांगचुक ने कहा है कि भारत जैसे लोकतंत्र में इसको सरकार की इनविंसिबिलिटी से ज्यादा उसकी इनएप्रोचेबिलिटी कम होने के मौके पर देखना चाहिए। उनका कहना है कि लोगों का सामने आकर अपनी बात रखना लोकतंत्र के लिए अच्छी बात है। नेपाल की आपदा का जिक्र करते हुए सोनम वांगचुक ने कहा है कि भारत को पर्यावरण को लेकर अब और देर नहीं करनी चाहिए। उनका कहना है कि हिमालय दुनिया की करीबन एक चौथाई आबादी के लिए यही स्त्रोत है। सोनम वांगचुक का कहना है कि जो मैदान जल रहे हैं और भारत को पर्यावरण की रक्षा के लिए सबसे आगे आकर इसके प्रति आवाज उठानी चाहिए।