Loading...
HomeLifestyleआखिर इस बार फरवरी में क्यों बढ़ रही है गर्मी, जानें क्या...

आखिर इस बार फरवरी में क्यों बढ़ रही है गर्मी, जानें क्या कहता है Survey?

WhatsApp Group Join Now
WhatsApp Channel Join Now

नई दिल्ली : भारत में शीत लहर अब बदल चुकी है। डाउन टू अर्थ विश्लेषण से यह पता चला है कि ये घटनाएं अब सिर्फ मुख्य सर्दी भारत में शीत लहर का पैटर्न बदल रहा है। 2026 में जनवरी में शीत लहर वाले 24 रिकॉर्ड हुए हैं परंतु फरवरी में एक भी नहीं। यह पांच सालों में पहली बार हुआ है। कुल 15 राज्यों में फैली 24 घटनाएं जो पिछले पांच सालों में दूसरी सबसे कम हैं। ठंड अब मुख्य सर्दी महीनों तक सीमित नहीं रही है। समय और जगह के अनुसार, बदल रही है। जनवरी-फरवरी के महीनों तक सीमित नहीं रही है। वहीं अब समय और जगह दोनों बदल रहे हैं जिसके चलते मौसम की अनिश्चितता बढ़ चुकी है।

2026 में क्या हुआ

इस साल जनवरी में देशभर में कुल 24 शीत लहर के दिन आए परंतु फरवरी में एक भी शीत सलह का दिन नहीं आया है। सर्दी का मौसम 28 फरवरी को खत्म हो रहा है। आईएमडी के अनुसार अब तापमान सामान्य से 2-4 डिग्री सेल्सियस ज्यादा रहने वाला है। आखिरी शीत लहर 25 जनवरी को राजस्थान, हिमाचल प्रदेश और हरियाणा के कुछ इलाकों में भी देखी गई वहीं शीत लहर वाले दिन 27 जनवरी तक हिमाचल में रहे हैं।

इससे फरवरी 2026 पिछले पांच सालों में पहला ऐसा महीना बन चुका है। इसमें शीत लहर नहीं आई। 2022 से 2025 तक फरवरी में शीत लहर के दिन आए थे। 2022 में 6, 2023 में 1, 2024 में 7 और 2025 में 5 दिन। पूरे सर्दी के मौसम में 2026 में कुल 24 शीत लहर के दिन थे। वहीं 15 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में फैले हुए थे। यह पिछले पांच सालों में दूसरी सबसे कम संख्या है (2023 में 21 दिन सबसे कम थे), 2024 में 38, 2022 में 30 और 2025 में 26 दिन थे।

समय में बड़ा बदलाव

शीत लहरें नवंबर-दिसंबर में कम और जनवरी-फरवरी में ज्यादा होती है। 2022-2024 में सर्दी में 65-72% घटनाएं हुई हैं परंतु 2025 में सब उलट गया। पोस्ट मानसून में 65% (49 दिन, 5 साल में सबसे ज्यादा) और सर्दी में सिर्फ 35%। नवंबर 2025 में सिर्फ 20 दिन शीत लहर आई (2022 से 10 गुना ज्यादा), 7 नवंबर से शुरु हुई। यह 13 राज्यों में फैली जिसमें उत्तर-पश्चिम, मध्य, पूर्व, उत्तर-पूर्व और दक्षिण सभी क्षेत्र शामिल थे। यह दिखाता है कि शीत लहरें अब मुख्य सर्दी के महीनों तक सीमित नहीं है।

कारण और प्रभाव

विश्लेषण में यह बोला गया है कि 2023 जैसी स्थितियां फरवरी में ठंड कम होने का कारण हो सकती हैं। पिछले साल ला नीना के कारण दक्षिण, मध्य और पूर्व में ठंड ज्यादा थी। अल नीनो से सर्दी जल्दी खत्म हो सकती है। गर्मी तेज हो सकती है। शीत लहरों की कमी रबी फसलों जैसे गेहूं को नुकसान पहुंचा सकती हैं क्योंकि ठंड फसलों के लिए जरुरी होती है।

विश्लेषण से यह साफ है कि भारत में शीत लहरों का पैटर्न बदल रहा है। समय पहले आना, जगह का फैलाव बढ़ना, घटना और अनियमितता बढ़ना। यह छोटा मोटा उतार चढ़ाव हो सकता है। जलवायु परिवर्तन से बड़े बदलाव का संकेत है। इन्हें लगातार ट्रैक करना जरुरी है ताकि किसानों, स्वास्थ्य और आपदा-प्रबंधन के लिए अच्छी तैयारी हो पाए।

Disclaimer

All news on Encounter India are computer generated and provided by third party sources, so read and verify carefully. Encounter India will not be responsible for any issues.

- Advertisement -

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisement -

Latest News

- Advertisement -
- Advertisement -

You cannot copy content of this page