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जो कलयुग में भगवान का भजन करेंगे, उन्हें कोई कष्ट-कलेश नहीं होगा: आचार्य तरुण डोगरा

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ऊना के झंबर में श्रीराम कथा के बीच श्रीराम व केवट संवाद सुनकर श्रोता हुए भाव विभोर

ऊना/सुशील पंडितः जिला ऊना की ग्राम पंचायत झंबर में चल रहे नौ दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान श्री राम कथा के सातवें दिन श्री राम और केवट संवाद का वर्णन करते हुए सुप्रसिद्ध कथावाचक आचार्य तरुण डोगरा ने बताया कि जब भगवान श्रीराम अपने कर्तव्यों को निर्वहन करते हुए सीता मैया व भ्राता लक्ष्मण के साथ 14 वर्षों के वनवास के लिए निकल पड़े तो जंगल के रास्ते में नदी पार करने के लिए जब उन्हें कोई समाधान दिखाई नहीं दिया तो एक केवट नामक मछुआरे के साथ उनकी भेंट हुई, वहीं कथावाचक द्वारा श्रोताओं के समक्ष वर्णित इस भेंट में नाव का सहारा लेने से जुड़े अद्भुत प्रसंग के वर्णन से सभी उपस्थित श्रोता भाव विभोर हो गए। क्योंकि आचार्य तरुण डोगरा द्वारा श्रीराम और केवट से जुड़े प्रसंग का संगीतमय चित्रण बड़े ही सुन्दर दोहों और चौपाइयों के साथ श्रोताओं को समझाया गया।

वहीं, इस धार्मिक अनुष्ठान में तरुण डोगरा ने श्रद्वालुओं को अपने मुखारविंद से श्रीराम कथामृत रसपान करवाते हुए कहा कि भगवान श्री सत्यनारायण जी का व्रत व तप करने से मनुष्य का जीवन सफल हो जाता है। उन्होंने कहा कि भक्ति व सुमिरन से कभी भी भय नहीं होता और भगवान का सुमिरन मार्ग अपनाने से जीवन के अंत में प्राणी को कोई भी कष्ट नहीं होता। उन्होने बताया कि ऐसा पौराणिक ग्रंथों में कहा गया है कि जो लोग कलयुग में भगवान का भजन करेंगे, उन्हें कोई कष्ट-कलेश नहीं होगा। उन्होंने कहा कि एक दृश्य से हमारा पूरा आचरण बदल सकता है। इसलिए आंख और कान सभी पर नियंत्रण होना बेहद जरूरी है। क्योंकि नर्क से बचने का एकमात्र सरल तरीका है कि हम रामायण का भजन करते रहें।

उन्होंने कहा कि जो जीव रामायण व भागवत भजन करेगा और जो भगवान के नाम में विश्वास रखता है वो आसानी से भव सागर से तर जाता है। भगवान पर जितना विश्वास करोगे, उतना ही अच्छा है। उन्होंने कहा कि अपने नेत्र, श्रवण और वाणी पर नियंत्रण रखना चाहिए। क्योंकि जैसा हम सुनते हैं, देखते हैं, ठीक वैसा ही आचरण करते हैं। ये आपके ऊपर निर्भर करता है कि आप क्या देख रहे हैं, क्या सुन रहे हैं। देखना और सुनना अगर सुधरा हुआ हो, अच्छा हो, तो व्यक्ति कभी गलत रास्ते पर नहीं जाएगा। जो उचित हो हमेशा वहीं देखो और सुनो। तरुण डोगरा ने कहा कि रामायण अमृत का यही अर्थ है कि हम भगवान के नाम का आश्रय लें, सत्संग करें, वहीं हमारे साथ जाएगा। इस दौरान उन्होने सब संगतों को हरे राम हरे राम, राम-राम हरे हरे भक्ति गीत सुनाकर मंत्रमुग्ध कर दिया। आपको बता दें कि इस नौ दिवसीय धार्मिक वार्षिक अनुष्ठान में जिला के अनेकों मठों के संत महात्मा विशेष रूप से पहुंचकर श्रीराम अमृत कथा का रसपान कर रहे हैं, इसके अलावा विभिन्न राजनीतिक दलों से जुड़े व धार्मिक आस्था रखने वाले बुद्धिजीवी भी विशेषतः इस ज्ञान गंगा में डुबकी लगा रहे हैं।

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