नई दिल्ली: भारत एक बार एक बार फिर होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते पश्चिम एशिया से तेल और गैस की सप्लाई शुरु करने की तैयारी में जुट गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत ने मिडिल ईस्ट से ऊर्जा कार्गो लाने के लिए जहाज भेजने की योजना लगभग तैयारी कर ली है। सरकार की अंतिम मंजूरी मिलने ही भारतीय टैंकर होर्मुज के रास्ते खाड़ी क्षेत्र की ओर रवाना हो सकते हैं।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान युद्ध शुरु होने के बाद यह पहली बार होगा जब भारत इस बेहद संवेदनशील समुद्री रास्ते से बड़े पैमाने पर तेल सप्लाई बहाल करने की कोशिश करेगा। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा मार्गों में गिना जाता है जहां से वैश्विक तेल सप्लाई का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है लेकिन फरवरी के आखिर में ईरान संघर्ष शुरु होने के बाद इस रास्ते पर आवाजाही लगभग ठप हो गई थी।
सूत्रों के अनुसार, पूरी योजना को अंतिम रुप दे दिया गया है। जहाजों की तैयारी भी शुरु हो चुकी है। सरकारी कंपनी शिंपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया ने भी खाड़ी क्षेत्र में फिर से ऑपरेशन शुरु करने की तैयारी कर ली है हालांकि इसके लिए भारतीय नौसेना और सरकार की अंतिम सुरक्षा मंजूरी का इंतजार किया जा रहा है।
भारत अपनी ऊर्जा जरुरतों के लिए वेस्ट एशिया पर निर्भर है। रुस से तेल खरीद बढ़ाने के बावजूद मिडिल ईस्ट से आने वाला तेल भारत के लिए सस्ता और जल्दी पहुंचने वाला ऑप्शन माना जाता है। वैक्लपिक सप्लाई रुट न सिर्फ महंगे पड़ रहे हैं बल्कि उनमें समय भी ज्यादा लग रहा है।
इसी बीच भारत ने सुरक्षा तैयारियां भी तेज कर दी हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, भारतीय नौसेना ने क्षेत्र में अपने युद्धपोतों की संख्या दोगुनी कर दी है। हवाई निगरानी भी बढ़ाई गई है। भारतीय युद्धपोत उन जहाजों को एस्कॉर्ट कर रहे हैं जो होर्मुज से सुरक्षित बाहर निकालते हैं या भारत की ओर आते हैं।
एस जयशंकर ने नई दिल्ली ने नई दिल्ली में ब्रिक्स बैठक के दौरान ईरान विदेश मंत्री अब्बास अराघची से मुलाकात भी की थी। माना जा रहा है कि इस दौरान होर्मुज में समुद्री सुरक्षा और भारतीय जहाजों की आवाजाही पर भी चर्चा हुई हालांकि अभी तक यह साफ नहीं है कि ईरान और अमेरिका दोनों ने भारत को इस रास्ते से जहाज भेजने की औपचारिक अनुमति दी है या नहीं है।
बेहद तनावपूर्ण बना हुआ है
मौजूदा हालात में होर्मुज के आस-पास का इलाका बहुत जरुरी है। एक ओर अमेरिका ईरानी बंदरगाहों और जहाजों पर दबाव बना रहा है। दूसरी ओर ईरान भी क्षेत्र में कड़ी निगरानी रखे हुए हैं। ऐसे में किसी भी देश के लिए वहां से जहाज निकालना आसान नहीं माना जा रहा है।
ऊर्जा संकट का असर भारत की अर्थव्यवस्था पर भी दिखने लगा है। बढ़ती तेल कीमतों और रुपये में कमजोरी के कारण आयात बिल तेजी से बढ़ा है। पीएम नरेंद्र मोदी भी लोगों से ईंधन बचाने और विदेशी मुद्रा की बचत करने की अपील कर चुके हैं।
