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संत रविदास का संदेश समाज को जोड़ने और समानता स्थापित करने का सबसे बड़ा आधार

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चंडीगढ़: हरियाणा के विकास एवं पंचायत मंत्री कृष्ण लाल पंवार ने बुधवार को पानीपत में आयोजित पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि संत शिरोमणि गुरु रविदास जी भारतीय संत परंपरा के महान संत, समाज सुधारक, कवि तथा निर्गुण भक्ति आंदोलन के प्रमुख स्तंभों में से एक थे। उन्होंने ऐसे समय में समाज को प्रेम, समानता, भाईचारे, सेवा और मानवता का संदेश दिया, जब जाति-पांति, छुआछूत और सामाजिक भेदभाव अपने चरम पर था। संत रविदास ने अपने जीवन और वाणी के माध्यम से समाज को नई दिशा दी और उनके विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने उनके समय में थे।

उन्होंने बताया कि संत शिरोमणि गुरु रविदास की पवित्र कलश यात्रा वाराणसी से प्रारंभ हुई है और देश के संगठन के तौर पर 27 जिलों से होकर गुजर रही है। यह यात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि संत रविदास जी के विचारों, सामाजिक समरसता, समानता, भाईचारे और मानवता के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का एक राष्ट्रीय अभियान है। मंत्री कृष्ण लाल पंवार ने कहा कि यात्रा जहां-जहां पहुंच रही है, वहां समाज के सभी वर्गों द्वारा इसका भव्य स्वागत किया जा रहा है।

30 जुलाई को यह पवित्र कलश यात्रा गुरुग्राम के सरहौल बॉर्डर पर पहुंचेगी, जहां प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं, संत समाज तथा विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधियों द्वारा इसका भव्य स्वागत किया जाएगा। इसके उपरांत कलश को गुरुग्राम स्थित श्री शीतला माता मंदिर में स्थापित किया जाएगा, जहां श्रद्धालु दर्शन एवं पूजन कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि यह यात्रा श्रद्धालुओं की वर्षों पुरानी आस्था को सम्मान देने के साथ-साथ समाज में आपसी भाईचारे और सामाजिक एकता को भी मजबूत करेगी।

हरियाणा सरकार संतों एवं महापुरुषों की विरासत को सुरक्षित रखने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। इसी कड़ी में कुरुक्षेत्र के उमरी में लगभग 5 एकड़ भूमि पर 124 करोड़ रुपए की लागत से गुरु रविदास धाम का निर्माण कराया जा रहा है। यह धाम आने वाली पीढिय़ों के लिए आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक प्रेरणा का महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा। यहां संत रविदास जी के जीवन, उनके दर्शन और सामाजिक संदेश को व्यापक रूप से संरक्षित एवं प्रसारित किया जाएगा। कृष्ण लाल पंवार ने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि वे संत शिरोमणि गुरु रविदास जी के प्रेम, समानता, भाईचारे, सेवा, सामाजिक न्याय और मानवता के संदेश को अपने जीवन में अपनाएं।

संत रविदास का जन्म लगभग 15वीं शताब्दी में उत्तर प्रदेश के वाराणसी के निकट सीर गोवर्धनपुर में हुआ माना जाता है। उनके पिता का नाम संतोक दास (रघु) तथा माता का नाम करमा देवी था। उन्होंने अपने जीवन से यह सिद्ध किया कि कोई भी कार्य छोटा या बड़ा नहीं होता, बल्कि मनुष्य की महानता उसके विचारों, कर्मों और सेवा भावना से तय होती है। मंत्री ने कहा कि संत रविदास जी की वाणी में प्रेम, करुणा, समानता और मानव कल्याण की भावना स्पष्ट दिखाई देती है। उन्होंने समाज को यह संदेश दिया कि ईश्वर तक पहुंचने का मार्ग केवल सच्चे कर्म, विनम्रता और निष्काम भक्ति है। उन्होंने लोगों को बाहरी आडंबर छोडक़र सत्य, सेवा और सदाचार का मार्ग अपनाने की प्रेरणा दी।

पंवार ने कहा कि 20 फरवरी को संत रविदास जी की जयंती पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जायेंगे, जो आगे तक जारी रहेंगे। संत रविदास ने बेगमपुरा नामक एक आदर्श समाज की परिकल्पना की थी। बेगमपुरा का अर्थ है ऐसा नगर, जहां कोई दुख, भय, अन्याय, भेदभाव, कर या शोषण न हो। वहां सभी लोग समान अधिकारों के साथ सम्मान पूर्वक और सुख पूर्वक जीवन व्यतीत करें। आज भी सामाजिक न्याय और समानता की चर्चा होती है तो संत रविदास जी की बेगमपुरा की परिकल्पना सबसे बड़ी प्रेरणा के रूप में सामने आती है। पत्रकार वार्ता के दौरान मंत्री ने संत रविदास के प्रसिद्ध वचनों का भी उल्लेख किया। मन चंगा तो कठौती में गंगा आज भी लोगों को यह संदेश देता है कि यदि मन पवित्र है तो ईश्वर की प्राप्ति कहीं भी संभव है।

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