चंडीगढ़: हरियाणा के कारागार मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा ने कहा कि हरियाणा सरकार का उद्देश्य जेलों को केवल सजा देने की व्यवस्था तक सीमित रखना नहीं है, बल्कि बंदियों को सुधार कर समाज की मुख्यधारा में वापस लाना भी है।
प्रदेश की सभी जेलों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ बंदियों के सुधार, कौशल विकास और पुनर्वास के लिए कई योजनाएं बनाई गई हैं। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के मार्गदर्शन में सरकार लगातार प्रयास कर रही है कि बंदी प्रशिक्षण प्राप्त कर आत्मनिर्भर बनें और रिहाई के बाद सम्मान के साथ समाज की मुख्यधारा में शामिल हो सकें। इसके लिए सरकार आर्थिक और प्रशासनिक स्तर पर हरसंभव प्रयास कर रही है।
सुरक्षा का नया ढांचा : रोहतक में हाई सिक्योरिटी जेल, कई जिलों में नई जेलों की तैयारी
जेल विभाग की बड़ी उपलब्धियों में नई और उच्च सुरक्षा वाली जेलों का निर्माण प्रमुख है। रोहतक में करीब 90 करोड़ रुपये की लागत से 312 बंदियों की क्षमता वाली हाई सिक्योरिटी जेल का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है।
जेल की चारदीवारी से बाहर की जिंदगी के लिए तैयारी
हरियाणा जेल प्रशासन की सुधारात्मक व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष बंदियों को सामान्य जीवन में लौटने के लिए तैयार करना है। फरीदाबाद और करनाल में ओपन एयर जेल स्थापित की गई हैं, जहां बेहतर आचरण वाले बंदियों को परिवार के साथ रहने का अवसर मिल रहा है।
बंदियों को रिहाई के बाद रोजगार के लिए तैयार करने की दिशा में पांच जेलों में आईटीआई केंद्र स्थापित किए गए हैं। यहां 12 ट्रेडों में औद्योगिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है और 255 बंदी प्रशिक्षण के लिए पंजीकृत हैं। गुरुग्राम जिला जेल में तकनीकी डिप्लोमा प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने का काम भी चल रहा है।
जेल उत्पादों से करोड़ों का कारोबार, पेट्रोल पंपों से नई पहचान
जेल की कार्यशालाओं मेंतैयार होने वाले उत्पाद अब बाजार में अपनी पहचान बना रहे हैं। बंदियों द्वारा तैयार फर्नीचर, हस्तशिल्प, कपड़े, खाद्य सामग्री और सजावटी वस्तुओं को विभिन्न मेलों और आयोजनों के माध्यम से बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है। सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय मेले और गीता जयंती महोत्सव में भी जेल उत्पादों के स्टॉल लगाए गए।