नई दिल्लीः दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने पार्टी के कई नेताओं और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया है। हिरासत में लिए गए नेताओं में अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका शामिल हैं। खबर के अनुसार, करीब 1,500 अन्य प्रदर्शनकारियों को भी पुलिस ने हिरासत में लिया है। इस कार्रवाई के बाद जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अपनी चिंता जाहिर की है। उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि हिरासत में लिए गए नेताओं को जल्द रिहा कर दिया जाएगा।
रविवार तक रिहाई नहीं हुई तो उठाएंगे बड़ा कदम
सोनम वांगचुक ने शनिवार शाम को कहा कि अगर हिरासत में लिए गए नेताओं को रविवार तक रिहा नहीं किया गया, तो वह भूख हड़ताल या पैदल मार्च शुरू करने पर विचार कर सकते हैं। उन्होंने साफ किया कि वह फिलहाल नेताओं की रिहाई का इंतजार कर रहे हैं। अगर तय समय तक रिहाई नहीं होती है, तो उन्हें आंदोलन के दूसरे तरीकों के बारे में सोचना पड़ सकता है।
भूख हड़ताल का मतलब है कि किसी मांग को लेकर व्यक्ति खाना छोड़कर विरोध करता है। वहीं, पैदल मार्च में लोग किसी मुद्दे पर ध्यान दिलाने के लिए एक जगह से दूसरी जगह तक पैदल चलते हैं।
देश के हालात को लेकर वांगचुक ने जताई चिंता
सोनम वांगचुक ने भारत के मौजूदा हालात पर चिंता जताते हुए इसे ‘अघोषित आपातकाल’ बताया। उनका कहना है कि देश में विरोध करने वाले लोगों और आंदोलन से जुड़े नेताओं के खिलाफ की जा रही कार्रवाई चिंताजनक है।
हालांकि, ‘अघोषित आपातकाल’ वांगचुक की अपनी राय और टिप्पणी है। इसका मतलब यह है कि उनके अनुसार देश में ऐसे हालात बन रहे हैं, जिनमें लोगों की आवाज उठाने की आजादी पर दबाव महसूस हो सकता है।
प्रदर्शन से पहले लोगों से की थी शांति बनाए रखने की अपील
वांगचुक ने बताया कि उन्होंने प्रदर्शन से पहले लोगों से एकजुट रहने और शांति बनाए रखने की अपील की थी। वह चाहते थे कि लोग अपनी मांगों को शांतिपूर्ण तरीके से सामने रखें। उन्होंने कहा कि उन्हें यह अंदाजा नहीं था कि आंदोलन से जुड़े नेताओं को ही हिरासत में ले लिया जाएगा। पुलिस की कार्रवाई के बाद अब उनकी चिंता हिरासत में लिए गए नेताओं की रिहाई को लेकर है।
जंतर-मंतर के प्रदर्शन में क्यों शामिल नहीं हुए सोनम वांगचुक
इससे पहले शुक्रवार को सोनम वांगचुक ने बताया था कि वह दिल्ली के जंतर-मंतर पर होने वाले प्रदर्शन में शामिल नहीं हो पाएंगे। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करके इसकी वजह बताई थी। वांगचुक के अनुसार, सरकार की ओर से उनके काम में रुकावट डालने और उनके प्रयासों को नुकसान पहुंचाने की कोशिशों के बावजूद उनकी टीम राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कामों में लगी हुई है। उन्होंने बताया कि उनकी टीम सर्दियों के आने से पहले जरूरी तैयारियां कर रही है। इसी वजह से वह दिल्ली में होने वाले प्रदर्शन में शामिल नहीं हो सकेंगे।
हिमालय में पानी की सुरक्षा और ग्लेशियर झीलों पर काम कर रही है टीम
सोनम वांगचुक ने बताया कि उनकी टीम हिमालयी क्षेत्रों में पानी की सुरक्षा को लेकर काम कर रही है। इसके साथ ही, टीम ग्लेशियर झीलों से आने वाली बाढ़ के खतरे से निपटने की तैयारी भी कर रही है। ग्लेशियर झीलें वे झीलें होती हैं, जिनमें ग्लेशियर यानी बर्फ के बड़े हिस्सों के पिघलने से पानी जमा होता है। कई बार इन झीलों में पानी बहुत ज्यादा बढ़ने या झील का किनारा टूटने से अचानक बाढ़ आ सकती है। इससे पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोगों और उनकी संपत्ति को नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है।
वांगचुक के मुताबिक, सर्दियां शुरू होने से पहले इन खतरों से निपटने की तैयारी करना जरूरी है। यही वजह है कि उनकी टीम इस समय हिमालयी क्षेत्रों में अपने काम पर ध्यान दे रही है।
अब सभी की नजर रविवार पर
दिल्ली में सीजेपी नेताओं और अन्य प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने के बाद सोनम वांगचुक ने उनकी जल्द रिहाई की उम्मीद जताई है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर रविवार तक नेताओं को रिहा नहीं किया गया, तो वह भूख हड़ताल या पदयात्रा जैसे कदम उठा सकते हैं। अब यह देखना होगा कि हिरासत में लिए गए नेताओं को कब रिहा किया जाता है और वांगचुक आगे क्या कदम उठाते हैं।
