अमृतसरः शिरोमणि अकाली दल ने पूरी लीडरशिप के साथ श्री अकाल तख्त साहिब में प्रार्थना की। इस मौके पर पार्टी अध्यक्ष ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने पार्टी के उद्देश्यों, आने वाले चुनावों, गुरबानी प्रसारण, जेल में बंद सिखों और अकाली दल के साथ संभावित गठबंधन समेत कई मुद्दों पर खुलकर बात की।
ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने कहा कि शिरोमणि अकाली दल को फिर से खड़ा करने का मकसद सिर्फ़ सत्ता पाना नहीं है, बल्कि पंजाब के लोगों और पंथ को उनके अधिकारों और सुविधाओं के बारे में जागरूक करना भी है। उन्होंने कहा कि पार्टी में कई नए लोग शामिल हुए हैं और कुछ ने पार्टी छोड़ी भी है, लेकिन उन्हें इसकी कोई चिंता नहीं है।
पार्टी के रजिस्ट्रेशन के बारे में उन्होंने कहा कि सभी जरूरी औपचारिकताएं पूरी हो चुकी हैं और उम्मीद है कि चुनाव आयोग जल्द ही इसे रजिस्टर कर देगा। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में पार्टी कुछ उम्मीदवारों के नामों का भी ऐलान करेगी। गुरबानी प्रसारण के मुद्दे पर ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने कहा कि गुरबानी प्रसारण पर किसी एक चैनल का एकाधिकार नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि SGPC को नियम बनाने चाहिए और उन नियमों के तहत सभी चैनलों को गुरबानी प्रसारित करने का अधिकार देना चाहिए।
भाई जगतार सिंह हवारा की पैरोल के बारे में उन्होंने कहा कि इस मामले पर अलग-अलग राजनीतिक दलों ने पत्र लिखे हैं, लेकिन इस मुद्दे का राजनीतिक फ़ायदा उठाने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। भाई बलवंत सिंह राजोआना के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि वह अपनी आस्था और विश्वास पर कायम हैं। उन्होंने कहा कि SGPC ने राजोआना की माफी के लिए अपील दायर की है और सरकार द्वारा 2019 में लिए गए फैसले को लागू किया जाना चाहिए। सुखबीर सिंह बादल के साथ संभावित गठबंधन के बारे में ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने कहा कि अगर सुखबीर बादल अपनी जिद छोड़कर श्री अकाल तख्त साहिब आते हैं और 2 दिसंबर के हुक्मनामे के आधार पर बातचीत के लिए तैयार होते हैं, तो कोई रुकावट नहीं है।
2027 के चुनावों के बारे में उन्होंने कहा कि शिरोमणि अकाली दल अपने सिद्धांतों, एजेंडे और विजन से पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने शहीदों और जेल में बंद सिखों के परिवारों को 35 प्रतिशत टिकट देने की बात भी दोहराई। इसके अलावा ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने कहा कि अगर उन्हें दोबारा श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार की सेवा संभालने का प्रस्ताव दिया जाता है, तो वे विनम्रतापूर्वक मना कर देंगे और किसी अन्य तरीके से पंथ की सेवा करेंगे।