अमृतसरः श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने पंथ की चढ़दी कला, बंदी सिंहों की रिहाई, गुरबानी प्रसारण और पवन स्वरूपों से संबंधित महत्वपूर्ण मुद्दों पर मीडिया से बातचीत की। जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने कहा कि पंथ की चढ़दी कला की अरदास हर सिख द्वारा सुबह-शाम की जाती है। उन्होंने कहा कि पंथ को राष्ट्रीय एकता और सहमति की आवश्यकता है, ताकि सिख कौम मिलकर आने वाली चुनौतियों का सामना कर सके। बंदी सिंहों की रिहाई के मुद्दे पर जत्थेदार ने कहा कि यह बहुत गंभीर मामला है।
लंबी सजाएं भुगत चुके बंदी सिंहों को मानवता के आधार पर रिहा किया जाना चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से भाई बलवंत सिंह राजोआना का ज़िक्र करते हुए कहा कि साल 2019 में फांसी की सजा को उम्रकैद में बदलने के संबंध में बात कही गई थी, लेकिन मामला अभी भी लटका हुआ है। उन्होंने केंद्र सरकार से इस मामले पर जल्द फैसला लेने की अपील की। भाई जगतार सिंह हवारा के बारे में जत्थेदार ने कहा कि उन्हें अपनी माता से मिलने के लिए पैरोल मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह एक बेटे का अपनी मां से मिलने का मानवीय अधिकार है और वह मां-बेटे के शीघ्र मिलन के लिए अरदास करते हैं। गुरबानी प्रसारण को लेकर ज्ञानी गड़गज्ज ने कहा कि शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी सिखों की चुनी हुई प्रतिनिधि संस्था है।
उन्होंने कहा कि SGPC द्वारा अपने चैनल के लिए केंद्र सरकार से मंजूरी हेतु लिखा गया है और केंद्र को इसकी मंजूरी जल्द देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि गुरबानी सबके लिए साझी है, लेकिन इसकी मर्यादा और सम्मान का ख्याल रखना ज़रूरी है। विदेशों में गुरुद्वारा साहिब बनाने के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि गुरुद्वारा साहिब बनाने पर रोक नहीं है, लेकिन श्री अकाल तख्त साहिब की मंजूरी और मर्यादा, सुरक्षा व सम्मान से संबंधित नियमों का पालन अनिवार्य है। पवन स्वरूपों को कंटेनर के माध्यम से ले जाने के मामले पर जत्थेदार ने कहा कि आगे से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि जहाँ भी गुरु ग्रंथ साहिब जी के पवन स्वरूप जाएं, वहाँ पांच सिंहों की उपस्थिति अनिवार्य हो।