नई दिल्ली: चीन के मध्य क्षेत्र में स्थित हुबेई में भीषण समुद्री तुफान डॉल्फिन का असर बढ़ता ही जा रहा है। बीते दिन इस तूफान के चलते अंदरुनी इलाकों में पहुंचने के साथ ही प्रशासन की ओर से ऐसे कई पर्यटन स्थल हैं जिनको बंद कर दिया गया है। इस दौरान निर्माण कार्य भी रोक दिया गया है। मौसम एक्सपर्ट्स ने प्रांत के उत्तर-पश्चिमी पहाड़ी इलाकों में काफी ज्यादा बारिश की आशंका भी जताई जा रही है।
यह इस साल चीन में आने वाले सबसे शक्तिशाली तूफान है। समुद्र में करीबन 3.728 मील तक चलने के बाद यह तूफान वीकेंड में चीन के पूर्वी तट पर पहुंचा। तूफान ने अपने साथ विशाल बादलों को भी घेर लिया जिसके चलते तटीय क्षेत्र में पानी-पानी हो गया।
11 लोगों की जा चुकी है जान
करीबन 5.8 करोड़ की आबादी वाला हुबई प्रांत कारों और इलेक्ट्रॉनिक सामानों के उत्पादन का बहुत बड़ा केंद्र है। हाल ही में यहां पर मायसक तूफान के बाद दो दुर्लभ बवंडर भी आए थे। इसमें कम से कम 11 लोगों की जान चली गई थी। राष्ट्रीय मौसम केंद्र के अनुसार, भारी बारिश के लिए दूसरा सबसे बड़ा खतरा दर्शाने वाले के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी कर दिया गया है। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि हुबई के उत्तर-पश्चिमी हिस्से में 24 घंटे के अंदर 250 मिमी तक बारिश हो सकती है।
चीन के इन राज्यों में येलो अलर्ट
बाढ़ और भूस्खलन के चलते शियांगयांग, हुआंगगांग और सुइझोऊ जैसे शहरों के लिए येलो अलर्ट जारी हुआ है। इंचाग में स्थित प्रसिद्ध थ्री गॉर्ज्स डैम के साथ-साथ कई पर्यटन स्थल अस्थायी तौर पर बंद हो गए हैं। इसके अलावा क्षेत्र में चल रहे 107 प्रमुख राजमार्ग और जलमार्ग के निमार्ण परियोजनाओं में से करीबन 26 परियोजनाओं को रोक दिया गया है।
हेनान प्रांत में भी जारी हुआ रेड अलर्ट
मौसम विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, जब तूफान की हवाएं हुबई के पश्चिमी पहाड़ों से टकराएंगी तो इससे बारिश का असर कई ज्यादा गुना तक बढ़ जाएगा। इसके अलावा पड़ोसी हेनान प्रांत में बाढ़ की आशंका के चलते भी रेड अलर्ट जारी कर दिया गया है। हुबई से करीबन 1.000 किलोमीटर की दूरी पर स्थित बीजिंग में भी इस तूफान का असर देखने को मिला है। शहर के चार बाहरी इलाकों में लेवल-1 इमरजेंसी लागू कर दी गई है। मंगलवार रात को अगले 24 घंटो में बीजिंग में पूरे साल की एक-तिहाई से ज्यादा बारिश हो सकती है।
जापान मौसम विज्ञान एजेंसी ने यह चेतावनी दी है कि तूफान चान-होम मंगलवार को देश के मुख्य भूभाग की ओर बढ़ सकता है। इसेस वहां पर भूस्खलन और तेज हवाओं का खतरा भी बढ़ता जा रहा है।