तरनतारनः पंजाब में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक गरमा गई है। इसी के चलते लगातार पार्टी के नेताओं का पार्टी छोड़कर दूसरी पार्टी में जाने का सिलसिला जारी है। वहीं शिरोमणि अकाली दल से निष्कासित किए जाने के सप्ताह बाद पंजाब के विधानसभा हलका खडूर साहिब से पूर्व विधायक रविंदर सिंह ब्रह्मपुरा ने मंगलवार को आम आदमी पार्टी (आप) ज्वाइन कर ली। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने ब्रह्मपुरा को आप में शामिल करते उन्हें बधाई दी। मान ने कहा कि अकाली दल अब पंथक नहीं, बल्कि एक परिवार की पार्टी बनकर रह गया है। जिसमें अब कोई भी टकसाली परिवार नहीं है।
मंगलवार को मुख्यमंत्री भगवंत मान ने चंडीगढ़ में ब्रह्मपुरा से बैठक की। जिस उपरांत ब्रह्मपुरा व उनके साथियों को आप में शामिल किया। आप में शामिल होते ही रविंदर सिंह ब्रह्मपुरा ने कहा कि धार्मिक बेअदबी के मामले में भगवंत मान की सरकार ने कानून में संशोधन करके सिख कौम के दिल जीते हैं। उन्होंने कहा कि अब शिअद में कोई टकसाली नहीं।
हरचंद सिंह लोगोंवाल, जगदेव सिंह तलवंडी, प्रेम सिंह लालपुरा, मोहन सिंह तुड़, कैप्टन कंवलजीत सिंह, रतन सिंह अजनाला, सेवा सिंह सेखवां समेत कई टकसाली परिवार अब शिअद से नाता तोड़ चुके हैं। ब्रह्मपुरा ने कहा कि सुखबीर सिंह बादल ने किसी अहंकार के चलते बिल्ला परिवार को खडूर साहिब का इंचार्ज बनाया। जिसके नतीजे सामूहिक अकाली दल को भुगतने पड़ेंगे।
बता दें कि 2016 में खडूर साहिब के उपचुनाव में करीब 65 हजार मतों से जीतने वाले रविंदर सिंह ब्रह्मपुरा काफी समय से शिअद खिलाफ झंडा उठाकर चल रहे थे। पट्टी हलके से संबंधित जिला परिषद सदस्य अवतार सिंह बिल्ला को शिअद में सुखबीर सिंह बादल ने शामिल किया था। जिसका विरोध करते ब्रह्मपुरा ने सार्वजनक तौर पर कहा था कि बिल्ला की तीन पीढ़ियां नशे से जुड़ी हैं। हालांकि बाद में बिल्ला की पत्नी रमनदीप कौर शेरों को खडूर साहिब का इंचार्ज बनाया गया।
13 सितंबर को खडूर साहिब की रैली दौरान पूर्व विधायक ब्रह्मपुरा वहां नहीं पहुंचे। बल्कि अकाली दल पर कटाक्ष किए। 15 सितंबर को सुखबीर सिंह बादल ने पूर्व विधायक रविंदर सिंह ब्रह्मपुरा को पार्टी से निष्कासित कर दिया था। बता दें कि अकाली दल में कदवार नेता रंजीत सिंह ब्रह्मपुरा तीन बार केबिनेट मंत्री व एक बार खडूर साहिब से सांसद रहे थे। माझा क्षेत्र में ब्रह्मपुरा परिवार का अच्छा जनाधार है। रविंदर सिंह ब्रह्मपुरा का आप में जाना पहले से ही तय हो चुका था।