चंडीगढ़ः जंतर-मंतर में छात्रों के प्रदर्शन के बाद आज केंद्रिय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया है। वहीं कॉकरोच पार्टी द्वारा सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर करके डेमोक्रेसी की जीत बताया गया। उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी को इस्तीफा भेजा है। वहीं इस्तीफे को लेकर छात्रों में जश्न माहौल पाया जा रहा है। वहीं केंद्रिय मंत्री के इस्तीफे पर वित मंत्री हरपाल चीमा का बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि भाजपा के कार्यकाल में सबसे ज्यादा पेपर लीक हुए। पेपर लीक को लेकर छात्रों द्वारा जंतर मंतर में प्रदर्शन किया जा रहा है। वहीं अन्य राज्यों में भी पेपर लीक को लेकर प्रदर्शन किए जा रहे है।
ऐसे में आज भाजपा को घुटने टेकने पड़ रहे है और केंद्रिय शिक्षा मंत्री ने पीएम मोदी को इस्तीफा भेज दिया है। इस इस्तीफे से युवा शक्ति की जीत हुई है। वित्त मंत्री ने कहाकि भाजपा का पतन शुरू हो गया है। इसी के साथ देश के बच्चों की ताकत के बारे में भाजपा को पता चल गया है। देश के बच्चों को काफी समय के बाद इंसाफ मिला है। उन्होंने कहाकि बच्चों की जीत के साथ भाजपा का अहंकार टूट गया है। उन्होंने कहा कि चुनावों में युवा पीढ़ी बच्चों को सबक सिखाएगी। बता दें कि धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया पर इसका ऐलान किया और इस्तीफा देने की वजह भी बताई। अपने चिट्ठी में उन्होंने लिखा कि पिछले चार दशक से अधिक समय से वह छात्र, शिक्षक और शिक्षा सुधार के लिए समर्पित रहे हैं।
उनका हमेशा से मानना रहा है कि मजबूत, समावेशी और दूरदर्शी शिक्षा व्यवस्था ही किसी भी राष्ट्र के विकास की आधारशिला होती है। धर्मेंद्र प्रधान ने कहा, “3 मई 2026 को आयोजित NEET-UG परीक्षा में अनियमितताओं की शिकायतें सामने आते ही सरकार ने तुरंत कार्रवाई की। मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई, परीक्षा रद्द कर दोबारा परीक्षा कराने का फैसला लिया गया और अगले साल से NEET को पूरी तरह कंप्यूटर आधारित (CBT) मोड में आयोजित करने की घोषणा की गई।”
धर्मेंद्र प्रधान ने लिखा कि 20 लाख से अधिक छात्रों की परीक्षा निष्पक्ष और सुचारु रूप से कराना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता थी। इसके लिए केंद्र सरकार, राज्य सरकारों, जिला प्रशासन, छात्रों और अभिभावकों के सहयोग से 21 जून 2026 को दोबारा परीक्षा सफलतापूर्वक आयोजित की गई। 16 जुलाई को घोषित परिणामों में गरीब और वंचित परिवारों के कई प्रतिभाशाली छात्रों को सफलता मिली, लेकिन कुछ जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों ने छात्रों को गुमराह करने की कोशिश की, जिससे उन्हें गहरा दुख पहुंचा।
अपने इस्तीफे पर धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि पिछले 10 दिनों की घटनाओं ने उन्हें बेहद व्यथित किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह उनके व्यक्तिगत सम्मान का विषय नहीं, बल्कि देश के युवाओं के भविष्य का सवाल है। उन्होंने कहा कि वह नहीं चाहते कि छात्रों का भविष्य कानूनी विवादों और राजनीतिक टकराव में उलझे या उनका ध्यान पढ़ाई से भटके। इसी भावना के साथ उन्होंने पद छोड़ने का निर्णय लिया।

