अमृतसर: कांग्रेसी नेता डॉ. राजकुमार वेरका ने NEET पेपर लीक मामले को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लोकतंत्र, युवाओं और संविधान की जीत है। उन्होंने कहा कि लगातार 39 दिन चले संघर्ष के बाद सरकार को झुकना पड़ा, जो युवाओं की एकता की बड़ी जीत है।
डॉ. वेरका ने कहा कि यह लड़ाई सिर्फ़ एक पेपर लीक की नहीं, बल्कि देश के लाखों युवाओं के भविष्य की लड़ाई है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने इस मुद्दे को ज़ोरदार ढंग से उठाया और युवाओं की आवाज़ बने। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब डॉ. भीम राव अंबेडकर द्वारा दिए गए संविधान ने हर नागरिक को अपनी बात रखने और अपने हक़ों के लिए संघर्ष करने का अधिकार दिया है और यह जीत उसी संवैधानिक प्रणाली की भी जीत है।
उन्होंने कहा कि जब तक देश में लोकतंत्र ज़िंदा है, तब तक जनता अपनी आवाज़ इसी तरह बुलंद करती रहेगी। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को नसीहत देते हुए कहा कि सरकार को फ़ैसले सोच-समझकर लेने चाहिए। उन्होंने किसान आंदोलन का हवाला देते हुए कहा कि पहले भी केंद्र सरकार को किसानों के लंबे संघर्ष के बाद कृषि कानून वापस लेने पड़े थे और अब युवाओं के रोष के कारण सरकार को यह कदम उठाना पड़ा है।
डॉ. वेरका ने आरोप लगाया कि पेपर लीक की घटनाएं अकेला मामला नहीं हैं। उन्होंने कहा कि एक नहीं, बल्कि क़रीब 30 पेपर लीक हो चुके हैं, जिससे लाखों विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित हुआ है। उन्होंने सवाल किया कि अगर एक ही एजेंसी का नाम बार-बार सामने आ रहा है तो उसे बार-बार ज़िम्मेदारी क्यों दी जाती है।
कांग्रेसी नेता ने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में सरकार की भूमिका भी शक के घेरे में है। उन्होंने मांग की कि प्रधानमंत्री देश के युवाओं से माफ़ी मांगें और इस मामले में ज़िम्मेदार मंत्रियों और संबंधित एजेंसी के खिलाफ तुरंत FIR दर्ज करके क़ानूनी कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि पेपर लीक जैसे गंभीर मामलों के लिए ज़िम्मेदार लोगों की गिरफ़्तारी करनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

