जालंधर, ENS: पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल के 5 दिन के दौरे के दौरान जालंधर से सासंद व पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी बैठक से दूर रहे। हालांकि चन्नी गुट बैकफुट आता दिखा और उन्होंने ऑल इज वेल कहकर मामले को खत्म किया। लेकिन दूसरी ओर चन्नी ने अभी भी भूपेश बघेल की बैठक में शामिल होने पर दूरी बनाई हुई है। वहीं भूपेश बघेल का दौरा 3 दिन के लिए बढ़ा दिया गया है। ऐसे में कांग्रेस हाईकमान इस विवाद को खत्म करने में लगी हुई है। बताया जा रहा है कि सांसद चरणजीत चन्नी ने AICC के पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल के आगे सरेंडर से इनकार कर दिया है।
चन्नी गुट ने बघेल से मुलाकात से पहले 2 शर्त रखते हुए कहा कि हमारे 2 नेता ही मिलेंगे, लेकिन न मीटिंग कांग्रेस भवन में होगी न उसमें प्रधान वड़िंग रहेंगे। गुरदासपुर के सांसद सुखजिंदर रंधावा इस मुलाकात में शामिल हो सकते हैं। हालांकि इतना जरूर है कि चन्नी हाईकमान पर प्रेशर बनाने में कामयाब नहीं हो सके। उनके बातचीत के लिए राजी होने से 3 दिन से हाईकमान पर बना प्रेशर रिलीज हो गया। वहीं राजा वड़िंग पावरफुल बनकर निकले हैं। वह लगातार अपनी ताकत दिखा रहे हैं। बघेल भी हाईकमान के फैसले को सही ठहराने के लिए पूर्व सीएम राजिंदर कौर भट्ठल जैसे नॉन एक्टिव नेताओं से तक मुलाकात करने के लिए उनके घर जा रहे हैं।
हालांकि बघेल को उम्मीद है कि उनकी दिल्ली वापसी से पहले चरणजीत चन्नी खुद मिल सकते हैं या उन्हें बुला सकते हैं। मगर, चन्नी के करीबी सोर्सेज का कहना है कि वह दिल्ली में राहुल गांधी से ही मिलना चाहते हैं ताकि अगर उन्हें चुनाव में बड़ी भूमिका मिलती है तो उस पर बघेल नहीं बल्कि सीधे राहुल गांधी की मुहर हो। इसके बाद ही वह आगे कोई बड़ा फैसला लेंगे।
वहीं राजा वडिंग बार-बार कह रहे है कि कांग्रेस में कोई गुटबाजी नहीं चल रही है। ऐसे में अगर बघेल इस गुटबाजी को खत्म करके नहीं गए तो अगले दिनों में कांग्रेस में फिर से उथल-पुथल की स्थिति बन सकती है। चन्नी गुट में कई नेता ऐसे हैं जो कि राजा वडिंग को प्रधान मानने को तैयार नहीं हैं। चन्नी ऐसी स्थिति में नहीं रहेंगे कि वो अपने समर्थकों को टिकट दिला सकें। उधर, राजा वडिंग का विरोध करने की वजह से वो उनका टिकट कटवाने का पूरा जोर लगाएं। ऐसे में चन्नी गुट के नेता भी चरणजीत सिंह चन्नी पर अब सरेंडर न करने का दबाव बना रहे हैं।

