नई दिल्ली: पिछले 15 दिनों में तेल की कीमतों ने पूरे दक्षिण एशिया में हलचल मचा दी है। कही दाम तेजी से बढ़े हैं तो कहीं सरकारों ने लोगों को राहत देने के लिए कटौती भी है। भारत में जहां लगातार पेट्रोल डीजल महंगा हुआ है। वहीं पाकिस्तान और कुछ अन्य देशों में स्थिति थोड़ी अलग रही है। मिडिल ईस्ट में तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असर सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि सभी पड़ोसी देशों पर पड़ा है। फर्क सिर्फ इतना है कि हर देश ने अपनी अर्थव्यवस्था के हिसाब से अलग फैसला लिया है।
यहां से आप अपने देश और पड़ोसी देशों का हाल जान सकते हैं। भारत में पिछले 15 दिनों के अंदर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में करीबन 7 से 8 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी देखी गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सिर्फ 10 से 12 दिनों में ही 4 बार दाम बढ़ाए गए हैं जिससे आम लोगों का बजट बिगड़ गया है।
भारत में हुआ बदलाव
भारत में पिछले 15 दिनों के अंदर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में करीबन 7 से 8 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी देखी गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सिर्फ 10 से 12 दिनों में ही 4 बार दाम बढ़ाए गए हैं जिससे आम लोगों का बजट बिगड़ गया है। पेट्रोल तो कई शहरों में 100 से 110 रुपये के पार पहुंच गया है और डीजल भी लगातार महंगा होता है। ट्रांसपोर्ट और रोजमर्रा की चीजों की कीमतें भी बढ़ी हैं।
पाकिस्तान में राहत
पाकिस्तान में स्थिति काफी उतार-चढ़ाव वाली रही है। कुछ समय पहले ही वहां पेट्रोल और डीजल में 50 रुपये की बड़ी उछाल देखने को मिली थी जिससे कीमतें 320 PKR प्रति लीटर के आस-पास पहुंच गई थी लेकिन बाद में सरकार ने अंतरराष्ट्रीय दबाव और घरेलू महंगाई को देखते हुए कुछ राहत भी दी है। शुरुआत में तेज बढ़ोतरी दिखी थी।
फिर बाद में मामूली कटौती हुई हालांकि कीमतें अभी भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई है। बांग्लादेश में पिछले 15 दिनों में तेल की कीमतों में कोई बहुत बड़ा बदलाव नहीं हुआ है लेकिन दाम पहले से ऊंचे स्तर पर हैं। इस देश में ईंधन पर सब्सिडी सीमित है इसलिए कीमतें स्थिर रहते हुए भी आम जनता के लिए भी महंगी बनी हुई है।
नेपाल में बढ़ा तेल
नेपाल में भी तेल की कीमतें भारत की तुलना में ज्यादा आयात निर्भरता के कारण प्रभावित होती है। पिछले 15 दिनों में हल्की बढ़ोतरी दर्ज हुई है। ट्रांसपोर्ट और रोजमर्रा की लागत पर असर हुआ है। सरकार कीमतों को नियंत्रित करने की कोशिश कर रही है।
श्रीलंका में सुधार
श्रीलंका जो हाल में ही आर्थिक संकट से गुजरा है। वहां तेल बाजार अब धीरे-धीरे स्थिर हो रहा है। कीमतों में बहुत बड़ा बदलाव नहीं हुआ है। आईएमएफ सपोर्ट के बाद नियंत्रण की कोशिश चल रही है लेकिन अभी भी कीमतें सामान्य से ज्यादा हैं।
चीन में नहीं पड़ता है बोझ
चीन में तेल की कीमतें सरकार के नियंत्रण में रहती है इसलिए वहां बड़े उतार-चढ़ाव कम देखने को मिलते ही हैं। पिछले 15 दिनों में हल्का बदलाव दिखा है। सरकार सब्सिडी और कंट्रोल के जरिए स्थिरता बनाए रखती है। वहां आम जनता पर अचानक बोझ नहीं पड़ता है।
भारत बनाम पड़ोसी
यदि ध्यान में देखें तो भारत में हालिया बढ़ोतरी सबसे ज्यादा तेज रही है। इसके पीछे कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, रुपये की कमजोरी, टैक्स स्ट्रक्चर और ऑयल कंपनियों की लागत एडजस्टमेंट ही कारण हैं। वहीं पाकिस्तान और श्रीलंका जैसे देश कभी राहत देते हैं तो कभी अचानक बढ़ोतरी करते हैं क्योंकि उनकी अर्थव्यवस्था ज्यादा अस्थिर रहती है। पिछले 15 दिनों का ट्रेंड साफ दिखाता है कि दक्षिण एशिया में तेल की कीमतें पूरी तरह वैश्विक बाजार पर निर्भर हो गई है। भारत में जहां लगातार बढ़ोतरी ने आम आदमी की जेब पर असर डाला है। वहीं बाकी देशों में कही राहत तो कहीं अस्थिरता बनी हुई है।

