नई दिल्लीः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान के बाद ‘दिमागी नक्सल’ पर छिड़े घमासान के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने उसी तरह की अपील कर दी है, जिसके जरिए अभिजीत दीपके ने देशभर से करोड़ों फॉलोअर्स को सोशल मीडिया पर जोड़कर सबको चौंका दिया। अब रत्ना सिंह ने दिमागी नक्सल पर विवाद छेड़ दिया है। वहीं दिमागी नक्सल जनता पार्टी का एक सोशल मीडिया पर अकाउंट भी बना दिया है।
आपको बता दें ये सिलसिला चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत के एक बयान के बाद जिस तरह दीपके ने देशभर के ‘कॉकरोच’ से एकजुट करने की अपील की थी, उसी तरह अब उनकी पार्टी ने सभी ‘दिमागी नक्सल’ को लेकर यह बात कही है।
सीजेपी की नेता और पार्टी के लीगल मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह ने दीपके वाली पंक्ति का इस्तेमाल दिमागी नक्सल को लेकर किया। उन्होंने लिखा, ‘क्या होगा यदि सारे दिमागी नक्सल एक साथ आ जाएं?’
15 अगस्त को पीएम मोदी के बयान के बाद रत्ना सिंह ने सोशल मीडिया पर यह सवाल किया तो हजारों लोगों ने इस पर प्रतिक्रिया दी। अंकुर नाम के एक यूजर ने लिखा, ‘आइडिया ही यही है कि सारे दिमागी नक्सल एक साथ बाहर आ जाएं और तब उनपर एक ही बार में राष्ट्रव्यापी कार्रवाई हो। मनीष शर्मा नाम के एक अन्य यूजर ने लिखा, वही जो जंगल के नक्सलों के साथ होता है। वास्तव में युद्ध का मैदान बदलने से परिणाम नहीं बदलता।
80वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जहां सशस्त्र नक्सलवाद का खतरा अब समाप्ति की ओर है, वहीं ‘दिमागी नक्सल’ सोच रखने वाले कुछ लोग ऐसे हैं, जो हिंसा और अशांति फैलाने के मौके तलाश रहे हैं और देश को गलत दिशा में ले जाना चाहते है। प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसे लोगों की पहचान कर उन्हें अलग-थलग करने की जरूरत है और युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ना चाहिए।
सीजेपी ने पीएम मोदी के बयान को युवाओं के प्रदर्शन से जोड़ने की कोशिश की। सीजेपी के सह संयोजक सौरभ दास ने कहा कि केवल सरकार पर सवाल उठाने के कारण पढे़ लिखे युवाओं को ‘नक्सली’ करार नहीं दिया जा सकता। दास ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘प्रधानमंत्री जी, ‘दिमागी नक्सल’ या ऐसी कोई भी बात काम नहीं आएगी। आप पढ़े-लिखे युवाओं को नक्सली वगैरह कैसे कह सकते हैं? सिर्फ इसलिए कि वे आपकी सरकार से सवाल पूछते हैं? यह सरासर अहंकार है। उनकी समस्याओं को हल करने में पूरी तरह नाकामी है।

