श्रीनगरः जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और वरिष्ठ पत्रकार निधि राजदान के विवाह को लेकर धार्मिक गलियारों में विवाद खड़ा हो गया है। ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने इस शादी के खिलाफ फतवा जारी करते इसे इस्लामी शरीयत की कसौटी पर पूरी तरह गैर-कानूनी और नाजायज करार दिया है। मौलाना के इस कड़े रुख और फतवे के सामने आने के बाद राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर नई बहस छिड़ गई है।
शरीयत के नियमों का नहीं हुआ पालन, शादी से पहले धर्म परिवर्तन की दी दलील
मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने रविवार को अपने बयान में कहा कि इस्लाम में निकाह को लेकर बेहद स्पष्ट और निर्धारित कायदे-कानून बनाए गए हैं। शरीयत के अनुसार एक मुस्लिम पुरुष और गैर-मुस्लिम महिला के विवाह को लेकर सख्त प्रावधान तय हैं। उन्होंने तर्क दिया कि चूंकि उमर अब्दुल्ला मुस्लिम हैं और निधि राजदान गैर-मुस्लिम हैं, इसलिए इस्लामी नजरिए से यह निकाह मान्य नहीं ठहरता।
मौलाना ने कहा कि यदि विवाह से पहले निधि राजदान का धर्म परिवर्तन कराकर उन्हें इस्लाम कबूल कराया जाता और उसके बाद निकाह होता, तभी यह रिश्ता इस्लामी नियमों के तहत जायज माना जा सकता था। धार्मिक नियमों की अनदेखी के चलते इस निकाह को शरीयत से खारिज किया जाता है।
उल्लेखनीय है कि 56 वर्षीय मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और 49 वर्षीय टेलीविजन पत्रकार निधि राजदान ने शुक्रवार को राजधानी दिल्ली में एक निजी समारोह के दौरान कानूनी रूप से विवाह किया था। सूत्रों के मुताबिक दोनों का यह विवाह किसी धार्मिक रीति-रिवाज के बजाय भारत के विशेष विवाह अधिनियम (स्पेशल मैरिज एक्ट) के तहत संपन्न हुआ है, जिसमें धर्म परिवर्तन की कोई अनिवार्यता नहीं होती।
शनिवार को उमर अब्दुल्ला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर तस्वीरों के साथ अपनी नई जिंदगी की शुरुआत की औपचारिक घोषणा की थी। यह दोनों की ही दूसरी शादी है, उमर अब्दुल्ला का अपनी पहली पत्नी पायल नाथ से इसी साल जुलाई में सुप्रीम कोर्ट के अंतिम आदेश के बाद कानूनी तलाक हुआ था।
