नई दिल्लीः सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को एक हैरतगंज मामला सामने आया है। जिसमें एक वकील ने जजों को पहले आदेश दिए, जिसके बाद हवा में फाइल उड़ाई और गालियां निकाली। जिससे कोर्ट रूम में अभूतपूर्व स्थिति पैदा हो गई।
ये मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट का बताया जा रहा है, जिसकी तेजी से सोशल मीडिया पर वीडियो भी वायरल हो रही है। इसके बाद सुरक्षाकर्मियों ने उसे तुरंत कोर्ट रूम से बाहर निकाल दिया।
जस्टिस केवी विश्वनाथन और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच के समक्ष कोर्ट नंबर-13 में सुनवाई के लिए आया था। याचिकाकर्ता प्रबल प्रताप, जो स्वयं अपना पक्ष रख रहे थे, शुरुआत से ही आक्रामक अंदाज में पेश हुए। सुनवाई के दौरान उन्होंने कथित तौर पर कहा कि न्यायपाल महोदय, मैं आपको लखनऊ के एसीपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश देता हूं। इस पर हैरानी जताते जस्टिस विश्वनाथन ने कहा कि आप मुझे आदेश दे रहे हैं? आप हमें आदेश दे रहे हैं।
इसके बाद प्रबल प्रताप ने कहा कि उनकी ओर से कहने के लिए अब कुछ नहीं है और कथित रूप से अपशब्द कहने के बाद अपनी केस फाइल हवा में उछाल दी। घटना के तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें काबू में लेकर कोर्ट रूम से बाहर कर दिया। इसके बाद अदालत की कार्यवाही सामान्य रूप से जारी रही।
बेंच ने अपने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता ने मामले पर दलील रखने के बजाय बेतुकी और असंसदीय बातें कहीं। हालांकि अदालत ने उनकी स्थिति को देखते उनके खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई न करने का फैसला किया। सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के अप्रैल 2026 के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका खारिज करते कहा कि विवादित आदेश में हस्तक्षेप का कोई ठोस आधार नहीं है।
गौरतलब है कि इससे पहले 6 अक्टूबर, 2025 को भी सुप्रीम कोर्ट में एक अप्रिय घटना हुई थी। वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश किशोर ने तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश बीआर गवई पर कथित तौर पर जूता फेंकने का प्रयास किया था। सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें तत्काल कोर्ट से बाहर कर दिया था।

