शिमलाः हिमाचल प्रदेश के मध्यवर्ती और पर्वतीय इलाकों में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। शिमला, सिरमौर, सोलन और किन्नौर जिलों में भारी वर्षा के कारण कई स्थानों पर भूस्खलन हुआ है और संपत्ति को नुकसान पहुंचा है। प्रदेश में 200 से अधिक सड़कें बंद हैं। इससे कई इलाकों का संपर्क प्रभावित हुआ है। नदी-नालों का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। संजौली कॉलेज के समीप बोथवेल क्षेत्र में भारी भूस्खलन हुआ है। इस कारण कई मकानों पर खतरा पैदा हो गया है। स्थानीय लोगों के अनुसार करीब तीन से चार इमारतें खतरे की जद में हैं और किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है। रिझाना में भूस्खलन के कारण गाड़ियां मलबे में दब गईं।
शनिवार तड़के करीब चार बजे हुए इस भूस्खलन से इलाके में दहशत का माहौल है। उस समय अधिकांश लोग अपने घरों में सो रहे थे। भूस्खलन संजौली कॉलेज की ओर जाने वाले मार्ग पर एक डंगा ढहकर नीचे रिहायशी मकानों की ओर जा गिरा। इससे मकानों तक जाने वाला रास्ता भी क्षतिग्रस्त हो गया। लगातार बारिश के चलते सांगला घाटी को जोड़ने वाले मुख्य वेली ब्रिज की नींव के पास अचानक भारी भूस्खलन हो गया। इसके कारण पुल का सांगला की तरफ का हिस्सा पूरी तरह ढह गया।
हालांकि, जिला प्रशासन की मुस्तैदी के चलते एक बड़ा हादसा होने से टल गया। सांगला के तहसीलदार हरदयाल ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि खतरे को पहले ही भांप लिया गया था। सुरक्षा के मद्देनजर पुल के दोनों ओर बैरिकेडिंग करके वाहनों की आवाजाही को समय रहते रोक दिया गया था। उन्होंने बताया कि वर्तमान में सांगला और छितकुल क्षेत्र के लिए वाहनों को तहसील कार्यालय सांगला के वैकल्पिक मार्ग से डायवर्जन देकर सुरक्षित निकाला जा रहा है।
दूसरी ओर, लिप्पा क्षेत्र के पेजर खड्ड में रात के समय अचानक जलस्तर बढ़ने से लिप्पा बस स्टैंड के पास बाढ़ जैसी गंभीर स्थिति उत्पन्न हो गई। वहीं, तेती खड्ड का बहाव अवरुद्ध (ब्लॉक) होने के कारण पानी ने एक बड़ी कृत्रिम झील का रूप ले लिया है। इस झील का पानी इतनी तेजी से फैला कि लिप्पा बस स्टैंड के पास बने कई मकानों की पहली मंजिल पूरी तरह जलमग्न हो गई है। इसके अलावा, इलाके की मुख्य सड़क के भी पानी में बहने का खतरा लगातार बना हुआ है।

