जालंधर, ENS: ईरान-इजरायल युद्ध को लेकर भारत में सकंट गहरा रहा है। दूसरी ओर सरकार ने देश में ईंधन की बिक्री और वितरण को लेकर एक बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने पेट्रोल-डीजल की कालाबाजारी रोकने और इसके विनियमन के लिए वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत नया आदेश जारी किया है। फिलहाल यह नई व्यवस्था शुरुआती तौर पर 90 दिनों के लिए लागू की गई है। यानी अगले तीन महीनों तक पेट्रोल पंपों पर ईंधन की बिक्री इन्हीं नियमों के तहत होगी। इस आदेश के बाद पेट्रोल पंप कर्मी का कहना है कि ईरान-इजरायल युद्ध के कारण महंगाई की मार पड़ रही है। कर्मी ने आदेश का विरोध किया है। उनका कहना है कि फैक्टरी संचालकों को काफी नुकसान होगा।
दरअसल, 2 हजार डीजल की लागत वाली फैक्टरियों पर इसका असर देखने को मिल सकता है। हालांकि नए आदेशों को लेकर कर्मी का कहना है कि उनके पास आदेश नहीं आए है और उन्हें इस बारे में अधिक जानकारी भी नहीं है। वहीं अन्य कर्मी का कहना है कि पेट्रोल-डीजल लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में उन्हें ट्रांसपोर्ट के दाम भी बढ़ाने पड़ रहे है। वहीं अब 200 लीटर डीजल एक दिन में इस्तेमाल किए जाने को लेकर कहा कि रोजाना लंबे सफर करने वाले वाहनों का दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में गाड़ियों को रास्ते में खड़ा करना पड़ सकता है। इससे लंबे सफर वाले वाहन चालको को नुकसान झेलना पड़ सकता है। वहीं अन्य कार चालक ने कहाकि सरकार के आदेशों का असर हमेशा आम जनता को ही भुगतना पड़ता है। उन्होंने कहा कि आम जनता सरकारों का बैंक है।
बता दें कि नई गाइडलाइंस में यह भी साफ किया गया है कि खरीदे गए हाई-स्पीड डीजल को किसी भी हालत में दोबारा बेचने (रीसेल) की अनुमति नहीं होगी। नियम तोड़ने पर कार्रवाई की संभावना भी जताई गई है। हालांकि सरकार चाहें तो इस अवधि से पहले भी नए आदेश जारी कर इन नियमों में बदलाव या इन्हें वापस ले सकती है। इस आदेश में कहा गया है कि किसी भी वाहन या व्यक्ति को एक दिन में पेट्रोल पंप पर 200 लीटर से अधिक डीजल नहीं मिलेगा।
नये नियम से लंबी तथा मध्यम दूरी के माल परिवहन वाले ट्रकों पर असर पड़ने की संभावना है। नए नियमों के अनुसार अब कोई भी व्यक्ति या वाहन एक दिन में पेट्रोल पंप से 200 लीटर से अधिक हाई-स्पीड डीजल नहीं खरीद सकेगा। सरकार ने पेट्रोल पंप डीलरों को साफ निर्देश दिए हैं कि इस सीमा का सख्ती से पालन किया जाए। हालांकि सामान्य कार चालकों पर इसका ज्यादा असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि अधिकतर निजी वाहनों के फ्यूल टैंक की क्षमता इस सीमा से काफी कम होती है।
