जालंधर, ENS: शहर में गोदाम से भारी मात्रा में एक्साइज विभाग द्वारा 706 पेटी शराब बरामद किए जाने का मामला गरमा गया है। इस मामले को लेकर आज भाजपा जिला प्रधान अशोक सरीन हिक्की सहित अन्य भाजपा नेता व कार्यकर्ता एक्साइज विभाग के डिप्टी कमिशनर रणजीत सिंह से मिलने पहुंचे, जहां उन्होंने मामले संबंधी सख्त कार्रवाई करने को लेकर मांग पत्र सौंपा। वहीं एक्साइज विभाग अधिकारी ने बताया कि यह कार्रवाई किसी एक जगह पर नहीं की गई। उनकी टीम द्वारा कई जगहों पर रेड की गई थी। इस दौरान एक गोदाम से उनकी टीम को 706 पेटी शराब की बरामद हुई थी। इसमें पंजाब की शराब और विदेशी शराब शामिल थी। इस मामले को लेकर शराब के ग्रुप मालिक को अवगत करवा दिया गया है।
अधिकारी ने कहाकि शराब सरकार की थी और सरकार अपने हिसाब से कमेटी बनाकर इसे डिस्ट्रॉय करेंगी। इस मामले को लेकर उक्त मालिक को बनती कार्रवाई के अनुसार जुर्माना लगाया जाएगा। अधिकारी ने बताया कि गोदाम मॉडल शराब ग्रुप निहाल भाई का है। वहीं एक्साइज विभाग की टीम की कार्रवाई के दौरान हथियार लेकर जाने वाला व्यक्ति गलती से आ गया था और इस मामले को लेकर टीम को सख्त निर्देश दे दिए गए है। भाजपा नेताओं का कहना हैकि हाल ही में वेस्ट विधानसभा में आबकारी विभाग द्वारा लगभग 706 पेटी अवैध शराब बरामद की है, जोकि काफी गंभीर मामला है। यह घटना शहर में अवैध शराब का कारोबार संगठित रूप से संचालित होने का संकेत देती है।
इससे सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान होने के साथ-साथ आम जनता के जीवन एवं स्वास्थ्य के साथ भी गंभीर खिलवाड़ हो सकता है। भाजपा नेता ने कहा कि इस अवैध शराब का वास्तविक मालिक कौन है, इसे कौन लेकर आया, किसके निर्देश पर इसका भंडारण किया गया तथा इसे किसे और कहां बेचा जाना था, इसकी निष्पक्ष एवं गहन जांच की जाए। इस बात की भी जांच की जाए कि दूसरे राज्यों से शराब लेकर आने वाले तस्कर किस तरह से किसके लिए क्यों शराब लेकर आए क्या ये शराब बड़े ब्रांड लगाकर निजी रूप से भरी तो नहीं है। इसकी क्वालिटी की जांच करना भी बहुत जरूरी है। वहीं इस अवैध कारोबार में संलिप्त पाए जाने वाले सभी ठेकेदारों, लाइसेंस धारकों एवं अन्य दोषियों के लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निरस्त किए जाएं तथा उनके विरुद्ध कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति जहरीली या अवैध शराब बेचकर जनता की जान और सरकारी राजस्व के साथ खिलवाड़ न कर सके।
बता दें कि नियमों के अनुसार हर ठेकेदार को शराब रखने के लिए अधिकृत गोदाम की जानकारी विभाग को देनी होती है। विभाग समय-समय पर इनकी जांच करता है ताकि स्टॉक का मिलान रिकॉर्ड से किया जा सके। शराब कारोबार में आमतौर पर दो तरह के साझेदार होते हैं। वर्किंग पार्टनर लाइसेंस, ठेकों का संचालन, स्टाफ और रोजमर्रा का पूरा प्रबंधन संभालते हैं। वहीं स्लीपिंग पार्टनर केवल निवेश करते हैं और कारोबार के संचालन में सीधे शामिल नहीं होते। विशेषज्ञों के अनुसार अधिकृत गोदाम में जगह कम होने से कभी-कभी शराब दूसरी जगह भी रखी जाती है, लेकिन इसकी जानकारी एक्साइज विभाग को देना जरूरी होता है। शराब की हर वैध बिक्री का रिकॉर्ड ठेकों के रजिस्टर में दर्ज होता है और उसी के आधार पर आय और मुनाफे का हिसाब किया जाता है। इसी वजह से विभाग अब यह भी जांच कर रहा है कि बरामद स्टॉक रिकॉर्ड के अनुरूप था या नहीं।