सेहत: हाथ या पैर में सूजन होना तब तक एक नॉर्मल साइन लगता है तब तक इसमें कोई दर्द नहीं होता। काफी लोगों को यह भले ही आम बात लगती है। लोग इसको गर्मी, देर तक बैठने, पुरानी चोट या फिर दिनभर थकान से जोड़ लेते हैं परंतु अगर आपकी सूजन ठीक नहीं हो रही या फिर धीरे-धीरे बढ़ती जा रही है तो ऐसे में इसको इग्नोर न करें। इस सूजन का कारण लिम्फेडेमा हो सकता है। लिम्फडोमा एक इस तरह की बीमारी होती है जिसमें आपका लिम्फेटिक सिस्टम अच्छे से काम नहीं करती।
त्वचा पर भी होता है असर
इसके कारण शरीर के टिश्यू में लिम्फ फ्लूइड यानी की एक तरह का लिक्विड जैसा पदार्थ जमा होने लगता है। काफी लोग इसको सूजन के साथ जोड़ लेते हैं परंतु यह समस्या और भी गंभीर हो सकती है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, समय के साथ लिम्फडोमा के चलते सिर्फ आपकी त्वचा को ही नहीं बल्कि मरीज को उठने-बैठने, चलने-फिरने और रोजमर्रा के काम करने में भी दिक्कत होती है।
आखिर क्या होता है लिम्फेडेमा?
शरीर के अंदर लिम्फेटिक सिस्टम और ग्रंथियों का एक पूरा नेटवर्क होता है। इस नेटवर्क का मुख्य काम अंगों और टिश्यू से एक्स्ट्रा तरल पदार्थ को इकट्ठा करना और उसको वापिस खून के बहाव में पहुंचाना होता है। इसके अलावा लिम्फेटिक सिस्टम इम्यूनिटी को मजबूत बनाने के लिए भी जरुरी होता है। जब शरीर की यह ड्रेनेज प्रणाली खराब हो जाती है तो उसमें कोई रुकावट हो जाती है। इसके चलते पूरी तरह से इसका विकास नहीं हो पाता। इसके चलते शरीर के कुछ अंगों में तरल पदार्थ जमा होने लगते हैं। इसके चलते प्रभावित हिस्से में भी सूजन हो सकती है। वैसे तो यह समस्या हाथ या पैर में ही होती है परंतु कुछ मामलों में चेहरा, गर्दन, पेट या फिर प्राइवेट पार्ट जैसे अंग भी इसकी चपेट में सकते हैं।
लक्षण न करें इग्नोर
लिम्फेडेमा के शुरुआती दौर में ज्यादा सूजन नहीं दिखती परंतु इसके लक्षण काफी मामूली होते हैं। मरीज को एक हाथ-दूसरे के मुकाबले थोड़ा भारी महसूस हो सकता है। इसके अलावा सालों से ठीक आपकी अंगूठी अचानक से उंगली में तंग होने लगती है। हाथ की घड़ी कलाई पर गहरा निशान छोड़ती है। इसके अलावा शरीर के एक हिस्से में जूते असामान्य तौर पर कसे हुए महसूस हो सकते हैं।
ऐसे करें बचाव
इसका कोई भी इलाज ऐसा नहीं होता जो हर मरीज पर बराबर असर करे। इसका उपचार पूरी तरह से बीमारी के कारण, जगह और उसकी गंभीरता पर निर्भर करता है। राहत की बात यहां पर यह है कि ज्यादातर मरीजों का इलाज बिना किसी सर्जरी के शुरु हो सकता है। इसके अलावा डेली एक्सरसाइज और शारीरिक एक्टिविटी से बंद नसों के आस-पास की मांसपेशियां भी एक्टिव हो जाती है। इससे लिक्विड का बहाव अच्छा होता है। इसके अलावा एक्सपर्ट्स जो थेरेपी देते हैं वो भी मददगार साबित होती है। त्वचा की देखभाल भी जरुरी होती है ताकि प्रभावित हिस्से में किसी भी तरह का इंफेक्शन रुक सके।