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शांति, भाईचारे और निष्काम कर्म के वैश्विक संदेश के साथ क्योटो (जापान) में अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव का भव्य समापन

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चण्डीगढ: जापान के ऐतिहासिक शहर क्योटो में अत्यधिक आध्यात्मिक उत्साह और सांस्कृतिक सद्भाव के साथ अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के जापान संस्करण का भव्य समापन समारोह आयोजित किया गया। इस गौरवशाली आयोजन में भगवद गीता के शाश्वत उपदेशों को दोहराते हुए वैश्विक शांति, आपसी भाईचारे और निष्काम कर्म के सार्वभौमिक संदेश पर विशेष बल दिया गया। इसके तहत टोक्यो विश्वविद्यालय में एक अत्यंत प्रतिष्ठित शैक्षणिक सेमिनार का शानदार आयोजन हुआ और एदोगावा की सड़कों पर भव्य गीता सद्भावना यात्रा निकाली गई, जिसने भारतीय प्रवासियों और जापानी समुदाय के हजारों लोगों को एकसूत्र में पिरो दिया।

ओसाका प्रान्त विधानसभा में पवित्र गीता भेंट की गई। ओसाका असेंबली में कुल 50 विधायक हैं, आश्चर्य की बात है जिसमें 49 विधायकों का विशिष्ट संगठन इंडो जापान फ्रेंडशिप फोरम के नाम से बनी हुई है। असेंबली में इनमें से 9 प्रतिनिधि विधायकों को स्वामी ज्ञानंद महाराज और आयुक्त एवं सचिव सूचना, जनसम्पर्क एवं भाषा विभाग एवं सदस्य सचिव कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड डॉक्टर अमित अग्रवाल के साथ कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के प्रतिनिधिमंडल ने श्रीमद्भगवद् गीता भेंट की। विधायकों ने भारत और जापान की संस्कृति के विभिन्न पहलुओं पर भी चर्चा की। एक जैसी सोच एक जैसी संस्कृति और संस्कारों पर दोनों देश एकजुट होकर कैसे कार्य करें इस पर विस्तृत चर्चा हुई।

ओसाका प्रान्त विधानसभा में परम पूज्य स्वामी ज्ञानानन्द महाराज, भारत के महावाणिज्य दूत डॉ. अब्दुल समी, डॉ. अमित अग्रवाल, उपेंद्र मानद सचिव सिंघल, प्राधिकरण सदस्य विजय नरूला और हिंदू स्वयंसेवक संघ के समर्पित सदस्य मौके पर उपस्थित रहे। इसके पश्चात इगाशी ओसाका के मेयर जुन्ज़ो नागाओ के साथ विशिष्ट प्रतिनिधि मंडल की बैठक उनके कार्यालय में संपन्न हुई जिसमें विधायक सतपाल जांबाजी, पंचकूला के मेयर श्यामलाल बंसल, रमिता अग्रवाल सहित कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के प्रतिनिधि शामिल हुए। क्योटो जापान की सांस्कृतिक राजधानी है और कुरुक्षेत्र हरियाणा की। इस नाते दोनों शहरों में किस तरह की सांस्कृतिक आदान-प्रदान की संभावनाएं हो सकती है इस बात पर चर्चा हुई।

दोपहर पश्चात क्योटो के जियान कॉर्नर नामक एक प्रसिद्ध सांस्कृतिक परिसर में श्रीमद् भागवत गीता का जापानी भाषा में परंपरागत काबूकी शो आयोजित हुआ जिसमें श्रीमद् भागवत गीता के मर्म को जापानी भाषा में मंचन हुआ। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह ने इस दिव्य महोत्सव के सफल आयोजन के लिए अपना एक विशेष वीडियो संदेश प्रसारित किया गया। उन्होंने इस शाश्वत उत्सव की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन भारत और जापान के बीच अंतर्राष्ट्रीय व सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत करते हैं।

वैश्विक गीता मंच के प्रणेता गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानन्द महाराज ने अपने उद्बोधन में कहा कि गीता किसी एक धर्म या क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरी मानवता के लिए शांतिपूर्ण जीवन जीने और सही मार्ग पर चलने की एक व्यावहारिक जीवन नियमावली है। स्वामी गुरुशरणानन्द महाराज ने सभा को अपना पावन आशीर्वाद देते हुए कहा कि गीता का प्राचीन ज्ञान भारत और जापान की गहरी आध्यात्मिक विरासतों को जोड़ने वाले एक मजबूत सेतु के रूप में कार्य करता है। कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के सदस्य सचिव डॉ. अमित अग्रवाल ने वर्तमान समय में गीता के दर्शन की वैश्विक प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि कैसे गीता का निष्काम कर्म और नैतिक मार्ग आज की आधुनिक चुनौतियों से निपटने में पूरी दुनिया का मार्गदर्शन कर सकता है।

इस समापन समारोह का एक मुख्य आकर्षण एक अद्भुत क्रॉस- अंतर-सांस्कृतिक प्रसिद्ध ओटानी ग्रुप द्वारा दी गई प्रस्तुति एक विशेष जापानी पारंपरिक नाटक काबुकी शो रहा। केइज़ो ओटानी और रियुसेई ओटानी ने अपने शानदार अभिनय से अंतरराष्ट्रीय दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस प्रस्तुति ने दोनों देशों के बीच गहरे सांस्कृतिक संबंधों और आपसी सम्मान को प्रदर्शित किया। भारतीय दूतावास द्वारा आयोजित इस भव्य और भावपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव का समापन समारोह स्वरूप रहा। स्वामी ज्ञानानंद के मार्गदर्शन में कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के प्रतिनिधिमंडल ने ओटानी यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर से दोनों देशों के बीच गीता पर शोध और कल्चरल एक्सचेंज पर भी चर्चा की और यूनिवर्सिटी में गीता भेंट की। इस्कॉन ने गीता के दिव्य संदेश को जन-जन तक पहुँचाने में अपना सामूहिक योगदान दिया।

जापान के क्योटो में अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव का यह सफल समापन, कुरुक्षेत्र के शाश्वत और अमर संदेश को वैश्विक पटल पर ले जाने में एक और मील का पत्थर साबित हुआ है। यह आयोजन उगते सूरज की भूमि जापान में शांति, जागरूकता और अटूट भाईचारे की एक अमिट छाप छोड़ गया है।

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