HomeGovernment Newsहरियाणा ने लोक अवसंरचना को दिव्यांगजनों, बुजुर्गों सहित सभी नागरिकों के लिए सुलभ बनाना किया...

हरियाणा ने लोक अवसंरचना को दिव्यांगजनों, बुजुर्गों सहित सभी नागरिकों के लिए सुलभ बनाना किया सुनिश्चित

WhatsApp Group Join Now
WhatsApp Channel Join Now

चंडीगढ़ : लोक अवसंरचना को समावेशी और बाधा-मुक्त बनाने के उद्देश्य से हरियाणा सरकार ने ‘राज्यों को पूंजीगत निवेश के लिए विशेष सहायता’ (एसएएससीआई) योजना के तहत वित्त पोषित बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में सार्वभौमिक सुलभता मानकों का अनुपालन अनिवार्य करने का निर्णय लिया है। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की वित्तीय आयुक्त डॉ. सुमिता मिश्रा ने जानकारी देते हुए बताया कि केंद्र प्रायोजित इस योजना के तहत सभी पात्र परियोजनाओं के लिए ‘दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016’ और ‘भारत में सार्वभौमिक सुलभता के लिए सुसंगत दिशानिर्देश और मानक, 2021’ का अनुपालन करना आवश्यक होगा। यह कदम मौजूदा इमारतों में बाद में बदलाव करने के बजाय, योजना और डिजाइन के स्तर पर ही सुलभता सुविधाओं को शामिल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण बदलाव है। इसके तहत लोक निर्माण विभाग और वास्तुकला विभाग यह सुनिश्चित करेंगे कि नई सरकारी इमारतों के साथ-साथ नवीनीकरण और मरम्मत कार्यों सहित सभी पात्र परियोजनाओं के डिजाइन और निष्पादन में सुलभता मानकों को शामिल किया जाए।

डॉ. मिश्रा ने कहा कि राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के पास लोक अवसंरचना का एक बड़ा नेटवर्क है, जिसमें मिनी सचिवालय भवन, तहसील और उप-तहसील कार्यालय परिसर, सरकारी आवासीय क्वार्टर और पारगमन फ्लैट शामिल हैं। विभाग यह सुनिश्चित करेगा कि उसके प्रशासनिक नियंत्रण के तहत आने वाली सभी परियोजनाओं में सुलभता मानदंडों को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए। डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि योजना और डिजाइन के चरण में ही सुलभता उपायों को एकीकृत करने से (आरपीडब्ल्यूडी) अधिनियम, 2016 के वैधानिक प्रावधानों का अनुपालन सुनिश्चित होगा, साथ ही निर्माण के बाद होने वाले महंगे रैट्रोफिटिंग (संशोधनों) की आवश्यकता भी समाप्त हो जाएगी। उन्होंने कहा कि शुरुआत से ही सार्वभौमिक डिजाइन सिद्धांतों को अपनाने से ऐसा बुनियादी ढांचा तैयार करने में मदद मिलेगी जो हर नागरिक के लिए समावेशी, टिकाऊ और सुलभ हो।

उन्होंने कहा कि सार्वभौमिक सुलभता केवल दिव्यांगजनों तक ही सीमित नहीं है। सार्वभौमिक सुलभता सिद्धांतों पर डिजाइन किया गया बुनियादी ढांचा वरिष्ठ नागरिकों, गर्भवती महिलाओं, बच्चों और अस्थायी रूप से चलने-फिरने में असमर्थ लोगों को भी लाभ पहुंचाता है। उन्होंने कहा कि रैंप, सुलभ प्रवेश द्वार, लिफ्ट, स्पर्श पथ, हैंड्रेल्स, सुलभ शौचालय और उचित साइनबोर्ड जैसी विशेषताएं सरकारी भवनों को समाज के सभी वर्गों के लिए सुरक्षित, अधिक सुविधाजनक और उपयोग में आसान बनाती हैं। उन्होंने कहा कि लोक अवसंरचना में सुलभता को मुख्यधारा में लाने से न केवल (आरपीडब्ल्यूडी) अधिनियम की वैधानिक आवश्यकताएं पूरी होंगी, बल्कि समावेशी और समान विकास के प्रति हरियाणा की प्रतिबद्धता भी मजबूत होगी।

इस निर्णय के साथ हरियाणा ने अपने बुनियादी ढांचे के नियोजन को ‘सुगम्य भारत अभियान’ (के राष्ट्रीय दृष्टिकोण के अनुरूप संरेखित किया है। इस कदम से भविष्य की लोक अवसंरचना परियोजनाओं के लिए सार्वभौमिक सुलभता को बाद के विचार के बजाय एक मुख्य डिजाइन आवश्यकता बनाकर एक नया मानदंड स्थापित करने की उम्मीद है।

 

- Advertisement - spot_img
- Advertisement - spot_img
- Advertisement - spot_img
- Advertisement -

Disclaimer

All news on Encounter India are computer generated and provided by third party sources, so read and verify carefully. Encounter India will not be responsible for any issues.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisement -

Latest News

- Advertisement -
- Advertisement -