चंडीगढ़: किसान नेता आज पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया से मिले और उन्हें अमेरिका ट्रेड डील के विरोध को लेकर मांग पत्र दिया। जिसके बाद मीडिया से बात करते हुए किसानों ने सख्त चेतावनी दी है। उनका कहना है कि अगर मांगे नहीं मानी गई तो आने वाले दिनों के बीच बड़ा संघर्ष से शुरू किया जाएगा। जिसको लेकर जन मुहिम की शुरुआत आने वाले 2 महीना में होगी। वहीं बलबीर राजेवाल ने अमेरिका ट्रेड डील का विरोध किया। अमेरिका में जो किसानी समझौता हो रहा है उसमें वहां के सिस्टम के साथ भारत का किसान मुकाबला नहीं कर सकता।
ऐसे में उसमें किसानी समझौता नहीं होना चाहिए। राजेवाल ने कहा कि भारत सरकार इस बात से मना कर रही है कि हमने समझौता नहीं किया बल्कि फ्रूट शब्द जैसे उन्होंने लिखा है। राजेवाल ने कहा कि केंद्र छुपाकर किसानी समझौता कर रहे है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर अमेरिका ट्रेड डील होती है तो हम संघर्ष करेंगे। वहीं बीबीएमबी के मुद्दे पर राजेवाल ने कहा कि पंजाब को बाहर कर दिया गया है और डैम सेफ्टी एक्ट बनाया है जो कि गैर सविधानिक है जिसमें पंजाब से इस परियोजना को छीनने की कोशिश है। उन्होंने कहा कि वेतन पंजाब देता है लेकिन पंजाब फैसले से बाहर है। ऐसे में उन्होंने केंद्र से बैठक की मांग की है।
राजेवाल ने कहा कि कर्जा मुक्ति को लेकर हमने किताब का जिक्र करते कहा कि किसान कर्ज में पैदा होकर कर्ज में मर जाता है और पहले एक बार जोहल कमेटी बनी थी जिसके बाद बदल के समय कमेटी बनी उसने भी स्टडी करके तथ्य सामने रखे थे जिसके बाद 18 वर्ष बीत चुके है जिसमें की 1 लाख 4 हजार करोड़ किसानों पर कर्ज है। वहीं बलदेव सिंह निहालगढ़ ने बाघा बॉर्डर खोलने की मांग की। उन्होंने कहा कि बाघा बॉर्डर खुलने से व्यापार खुलेंगे। ऐसे में किसान की आमदनी बढ़ेगी और मजदूर को भी काम मिलेगा। सीमा पर लगी कंडियाल तार से किसानों को किसानी करने में परेशानी होती है, जहां कई तरह के प्रतिबंध है। इस दौरान इसे कम करने की मांग रखी है। उन्होंने कहा कि किसानों को 10 हजार प्रति एकड़ मुआवजा मिलता है, लेकिन अब उसे बढ़ाकर 30 हजार किया जाए।
