HomeGovernment Newsजापान की संसद और शीर्ष नेताओं तक पहुंचा श्रीमद्भगवद्गीता का संदेश

जापान की संसद और शीर्ष नेताओं तक पहुंचा श्रीमद्भगवद्गीता का संदेश

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चंडीगढ़: भारत की सनातन सांस्कृतिक विरासत और श्रीमद्भगवद्गीता के सार्वभौमिक संदेश को वैश्विक मंच पर स्थापित करने की दिशा में जापान के टोक्यो में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव (आईजीएम)-2026 मील का पत्थर साबित हुआ है। इस महोत्सव के दौरान जापान की राष्ट्रीय संसद (डाइट) के सदस्यों तथा देश के प्रमुख राजनीतिक एवं सामाजिक नेताओं को श्रीमद्भगवद्गीता की प्रतियां भेंट की गईं जिससे यह आयोजन भारत और जापान के बीच लगातार मजबूत हो रहे सांस्कृतिक, आध्यात्मिक एवं मानवीय संबंधों का जीवंत प्रतीक बनकर उभरा।

अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव के शुभारंभ अवसर पर शुक्रवार को जापान की सत्तारूढ़ लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (एलडीपी) के वरिष्ठ नेता श्री यासुतोशी निशिमुरा को गीता की प्रति भेंट की गई। इसके अलावा जापान की संसद के उच्च सदन (हाउस ऑफ काउंसिलर्स) में गीता की स्थापना में सहयोग देने वाले योशियो मोचिजुकी तथा निचले सदन (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) में गीता की स्थापना में सहयोग प्रदान करने वाले अटलांटिक फ्लैट को भी श्रीमद्भगवद्गीता की प्रतियां भेंट कर सम्मानित किया गया।

गीता मनीषी एवं आध्यात्मिक गुरु पूज्य स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज द्वारा गीता ज्ञान की विस्तृत व्याख्या की गई। इस अवसर पर कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के सदस्य सचिव और सूचना, जनसंपर्क एवं भाषा तथा संस्कृति विभाग के आयुक्त एवं सचिव डॉ. अमित कुमार अग्रवाल, कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के मानद सचिव उपेंद्र सिंघल, जापान में भारतीय समुदाय के प्रमुख प्रतिनिधि अजय नारुला, रोहन अग्रवाल, विनय, श्रीहरि तथा अंतर्राष्ट्रीय गीता जयंती मेला प्राधिकरण के सदस्य श्री विजय नारुला सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। इस अवसर पर आयोजित विचार गोष्ठी में श्रीमद्भगवद्गीता की वैश्विक प्रासंगिकता, विश्व शांति एवं मानव कल्याण में आध्यात्मिक मूल्यों की भूमिका तथा भारत-जापान मैत्री को और अधिक सुदृढ़ बनाने के विषयों पर सार्थक चर्चा हुई।

स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज ने अपने उद्बोधन में कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता सम्पूर्ण मानवता के लिए जीवन प्रबंधन का कालजयी ग्रंथ है। यह मनुष्य को कर्तव्यनिष्ठा, आत्मानुशासन, नेतृत्व क्षमता, नैतिक मूल्यों और संतुलित जीवन जीने की प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में, जब तनाव, प्रतिस्पर्धा और संघर्ष बढ़ रहे हैं, तब गीता की शिक्षाएं मानव जीवन को शांति, आत्मविश्वास और आंतरिक संतुलन प्रदान करने का प्रभावी मार्ग दिखाती हैं।

जापानी सांसद योशियो मोचिजुकी द्वारा आधुनिक जीवन में बढ़ते कार्यभार और तनाव से मुक्ति का उपाय पूछने पर स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने श्रीमद्भगवद्गीता के तीन महत्वपूर्ण श्लोकों का उल्लेख करते हुए उनके आध्यात्मिक और व्यावहारिक पक्ष की व्याख्या की। उन्होंने बताया कि गीता का निष्काम कर्म, समत्व और आत्मसंयम का संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना हजारों वर्ष पूर्व था।

स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने कहा कि भारत और जापान के बीच सांस्कृतिक, आर्थिक और आध्यात्मिक संबंध लगातार नए आयाम प्राप्त कर रहे हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि गीता का संदेश दोनों देशों के बीच आध्यात्मिक और मानवीय मूल्यों के सेतु को और अधिक मजबूत करेगा।

कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के सदस्य सचिव डॉ. अमित कुमार अग्रवाल ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव आज भारत की सांस्कृतिक पहचान का वैश्विक प्रतीक बन चुका है। इसके माध्यम से विश्वभर में गीता अध्ययन, शोध, सांस्कृतिक संवाद और भारतीय दर्शन के प्रति रुचि में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। जापान सहित अनेक देशों में गीता पर आधारित अकादमिक शोध, अनुवाद परियोजनाएं तथा सांस्कृतिक सहभागिता के नए अवसर विकसित हुए हैं। उन्होंने कहा कि जापान हरियाणा का एक महत्वपूर्ण निवेश साझेदार है और राज्य सरकार विनिर्माण, ऑटोमोबाइल, प्रौद्योगिकी, लॉजिस्टिक्स, नवाचार तथा उन्नत उद्योगों के क्षेत्रों में जापानी निवेश को सक्रिय रूप से प्रोत्साहित कर रही है। इससे दोनों देशों के बीच आर्थिक एवं औद्योगिक सहयोग भी लगातार मजबूत हो रहा है।

कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के मानद सचिव उपेंद्र सिंघल ने बताया कि वर्ष 2016 से कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड द्वारा आयोजित किया जा रहा अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव आज एक वैश्विक सांस्कृतिक आंदोलन का स्वरूप धारण कर चुका है। वर्ष 2019 से हरियाणा सरकार ने मॉरीशस, यूनाइटेड किंगडम, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, श्रीलंका तथा इंडोनेशिया सहित अनेक देशों में अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव का सफल आयोजन किया है। भारत सरकार के विदेश मंत्रालय तथा विदेशों में स्थित भारतीय मिशनों के सहयोग से गीता का संदेश विश्व के कोने-कोने तक पहुंच रहा है। उल्लेखनीय है कि गत वर्ष भारतीय मिशनों द्वारा 53 देशों में गीता आधारित कार्यक्रम आयोजित किए गए थे।

उल्लेखनीय है कि अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव-2026 का आयोजन 19 से 23 जून तक जापान में किया जा रहा है। इसकी शुरुआत जापान की संसद, प्रमुख राजनीतिक नेताओं, विद्वानों एवं भारत-जापान मैत्री के समर्थकों को श्रीमद्भगवद्गीता भेंट करने के साथ हुई है। अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव आज भारत की सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक कूटनीति का एक प्रभावी माध्यम बन चुका है। यह महोत्सव विश्व शांति, सद्भाव, नैतिक मूल्यों और ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना को सशक्त रूप से आगे बढ़ाते हुए सम्पूर्ण मानवता को एक परिवार के रूप में जोड़ने का कार्य कर रहा है।

 

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