नई दिल्ली: डोनाल्ड ट्रंप को अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लग गया है। सुप्रीम कोर्ट ने डोनाल्ड ट्रंप को नवंबर में होने वाले मिडटर्म चुनावों के लिए मेल बैलेट पर नए और व्यापक नियम लागू करने से रोक दिया है। ट्रंप यह चाहते हैं कि अमेरिका के लोगों को डाक की मदद से वोट डालने के बड़े स्तर पर अनुमति न मिले। उन्होंने इसके लिए नए नियम भी बनाए थे परंतु निचली अदालत ने उस पर प्रतिबंध लगा दिया। वहीं ट्रंप सरकार ने इसके खिलाफ अब सुप्रीम कोर्ट में आपातकालीन अपील भी डाली थी। ऐसे में अब सुप्रीम कोर्ट ने इस अपील को खारिज कर दिया है।
सरकार के लिए यह साबित करना मुश्किल है
कोर्ट ने अपने बिना हस्ताक्षर वाले आदेश में यह बोला है कि सरकार के लिए यह साबित करना मुश्किल है कि जिला अदालत के शुरुआती आदेश को चुनौती देने के मामले में उसकी जीत की संभावना कितनी मजबूत है। कोर्ट ने कहा है कि आपातकालीन राहत देने के लिए जिन बातों पर विचार किया जाता है वो इस मामले में प्रतिबंध हटाने के पक्ष में ही नहीं है।
ऐसे में उनके फैसले से यह अंतिम रुप से तय ही नहीं हुआ है कि डाक सेवा भविष्य के चुनावों में ऐसे नियम भी लागू कर सकती है या फिर नहीं परंतु फिलहाल अब यह सुनिश्चित हो चुका है कि तीन नंवबर को जो चुनाव होने वाले हैं उनमें इन नियमों का इस्तेमाल नहीं होगा। इन्हीं चुनावों में यह भी तय होगा कि प्रतिनिधि सभा और सीनेट पर किसका नियंत्रण रहने वाला है।
नहीं बदले जाएंगे चुनाव के नियम
नॉर्थ कैरोलिना के अटॉर्नी जनरल जैफ जैक्सन ने कहा है कि मतदान शुरु हो गया है। चुनाव के बीच में नियम नहीं बदले जा पएंगे। दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों से जुड़े चुनाव अधिकारियों ने कोर्ट से 2026 के चुनाव के लिए इन नियमों को रोकने की मांग भी की थी।
ट्रंप सरकार का यह कहना है कि ये नियम संविधान के विपरित है और इसका मकसद चुनाव प्रक्रिया की सुरक्षा और विश्वसनीयता को बढ़ाना है। डेमोक्रेटिक पार्टी के नेतृत्व वाले राज्यों और मतदान अधिकारों से जुड़ी हुई संस्थाओं का यह तर्क भी था कि डाक सेवा चुनावों को नियंत्रित करने की कोशिश कर रही है। ऐसे में अमेरिका के संविधान के अनुसार चुनावों का संचालन और नियमन मुख्य तौर पर राज्यों की जिम्मेदारी होता है।