हाइलाइट्स:
- सभी 7 आरोपी गिरफ्तार चंडीगढ़ के सेक्टर-37 स्थित भाजपा कार्यालय पर ग्रेनेड हमले में शामिल सभी सातों आरोपियों को महज चार दिनों के भीतर गिरफ्तार
- मुख्य आरोपी अमनप्रीत सिंह और गुरतेज सिंह को हरियाणा के रेवाड़ी से पकड़ा
- आईएसआई द्वारा आरोपियों को हमले के बदले 2 लाख रुपये का लालच दिया गया था।
चंडीगढ़, 5 अप्रैल 2026 | पंजाब पुलिस | काउंटर इंटेलिजेंस | ग्रेनेड अटैक: पंजाब पुलिस के काउंटर इंटेलिजेंस विंग ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए चंडीगढ़ के सेक्टर-37 स्थित भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) कार्यालय पर हुए ग्रेनेड हमले के सभी सातों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। इस पूरे ऑपरेशन में चंडीगढ़ पुलिस और हरियाणा पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने अहम भूमिका निभाई। पंजाब के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) गौरव यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस पूरे मामले का खुलासा किया और बताया कि यह हमला पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के इशारे पर विदेश में बैठे हैंडलरों द्वारा करवाया गया था।
हमला कब और कहाँ हुआ?
1 अप्रैल 2026 को चंडीगढ़ के व्यस्त इलाके सेक्टर-37 में भाजपा कार्यालय के बाहर एक हैंड ग्रेनेड फेंका गया था। इस हमले ने पूरे पंजाब और चंडीगढ़ में सनसनी फैला दी थी। घटना के तुरंत बाद पंजाब पुलिस का काउंटर इंटेलिजेंस विंग हरकत में आया और चंडीगढ़ तथा हरियाणा पुलिस के साथ मिलकर संयुक्त ऑपरेशन शुरू किया।
कौन हैं मुख्य आरोपी? जानिए पूरी जानकारी
इस मामले में दो मुख्य आरोपियों को हरियाणा के रेवाड़ी से गिरफ्तार किया गया है। दोनों की पहचान इस प्रकार है:
1. अमनप्रीत सिंह — ग्रेनेड फेंकने वाला मुख्य आरोपी
अमनप्रीत सिंह रूपनगर जिले के रतनगढ़ का निवासी है। यही वह शख्स है जिसने भाजपा कार्यालय के बाहर हैंड ग्रेनेड फेंका। अमनप्रीत का आपराधिक इतिहास पहले से दर्ज है — एसएएस नगर (मोहाली) और हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर में उसके खिलाफ चोरी और लूट के मामले पहले से दर्ज हैं। यह साफ दर्शाता है कि विदेशी हैंडलरों ने जानबूझकर पहले से आपराधिक प्रवृत्ति के व्यक्ति को इस काम के लिए चुना।
2. गुरतेज सिंह — वीडियो रिकॉर्डिंग करने वाला आरोपी
गुरतेज सिंह भी रूपनगर जिले के रतनगढ़ का ही रहने वाला है। हमले के दौरान गुरतेज ने हैंडलर के निर्देश पर पूरी घटना को अपने मोबाइल फोन पर रिकॉर्ड किया ताकि विदेशी आकाओं को सबूत भेजा जा सके। यह तथ्य इस बात की पुष्टि करता है कि यह एक सुनियोजित और निर्देशित आतंकी साजिश थी।
पहले गिरफ्तार हुए पाँच आरोपी — हथियार और ग्रेनेड भी बरामद
इन दो मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी से एक दिन पहले इस नेटवर्क से जुड़े पाँच अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया जा चुका था। इनके नाम हैं:
- बलविंदर लाल उर्फ शमी
- जसवीर सिंह उर्फ जस्सी
- चरणजीत सिंह उर्फ चन्नी
- रूबल चौहान
- मनदीप उर्फ अभिजोत शर्मा
इन पाँचों की गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने इनके पास से एक हैंड ग्रेनेड और एक .30 बोर जिगाना पिस्तौल बरामद की। इन हथियारों की बरामदगी इस बात का संकेत है कि यह गिरोह भविष्य में और बड़े हमलों की योजना बना रहा था।
आईएसआई द्वारा विदेश से चलाई गई साजिश
डीजीपी गौरव यादव ने खुलासा किया कि इस पूरे हमले के पीछे पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई का नेटवर्क काम कर रहा था। इस साजिश को दो विदेशी हैंडलरों ने अंजाम दिलाया:
- बलजोत सिंह उर्फ जोत — पुर्तगाल में स्थित आईएसआई समर्थित हैंडलर
- हरजीत सिंह लाडी — जर्मनी से ऑपरेट करने वाला हैंडलर
इन दोनों विदेशी हैंडलरों ने आरोपियों को हमला करने के बदले 2 लाख रुपये देने का लालच दिया था। यह रकम कई स्तरों — यानी कटआउट्स और सब-मॉड्यूल — के जरिए भेजी और मैनेज की जानी थी ताकि पुलिस तक सीधी कड़ी न पहुँचे।
साजिश कैसे रची गई? — पूरी टाइमलाइन
करीब 6 महीने पहले (अक्टूबर 2025) गुरतेज सिंह सोशल मीडिया के जरिए विदेशी हैंडलर के संपर्क में आया। धीरे-धीरे उसे भड़काया गया और हमले के लिए तैयार किया गया।
28 मार्च 2026 गुरतेज सिंह ने रूबल चौहान और मनदीप उर्फ अभिजोत शर्मा के साथ मिलकर एसबीएस नगर के गाँव भरापुर में जसवीर उर्फ जस्सी से हथियारों और ग्रेनेड की खेप प्राप्त की।
1 अप्रैल 2026 — रेकी हमले से पहले आरोपियों ने भाजपा कार्यालय, सेक्टर-37 की रेकी की और पूरी योजना को अंतिम रूप दिया।
1 अप्रैल 2026 — हमला अमनप्रीत सिंह ने भाजपा कार्यालय के बाहर ग्रेनेड फेंका। गुरतेज सिंह ने पूरी वारदात मोबाइल पर रिकॉर्ड की और दोनों मौके से फरार हो गए।
4 अप्रैल 2026 पाँच अन्य आरोपी गिरफ्तार, हथियार बरामद।
5 अप्रैल 2026 मुख्य आरोपी अमनप्रीत और गुरतेज हरियाणा के रेवाड़ी से गिरफ्तार। सभी 7 आरोपी हिरासत में।
डीजीपी गौरव यादव ने क्या कहा?
प्रेस कॉन्फ्रेंस में डीजीपी गौरव यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब को सुरक्षित बनाने का अभियान पूरी प्रतिबद्धता के साथ जारी है। उन्होंने चंडीगढ़ पुलिस और हरियाणा पुलिस एसटीएफ की टीमों की सराहना करते हुए कहा कि इस संयुक्त ऑपरेशन ने एक बड़े आतंकी नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में एडीजीपी काउंटर इंटेलिजेंस अमित प्रसाद, एडीजीपी आंतरिक सुरक्षा एस.के. वर्मा, आईजीपी इंटेलिजेंस डॉ. सुखचैन सिंह गिल और एआईजी एसएसओसी एसएएस नगर दीपक पारिक भी मौजूद रहे।
चंडीगढ़ ग्रेनेड हमले का पर्दाफाश पंजाब पुलिस की काउंटर इंटेलिजेंस क्षमता की एक बड़ी मिसाल है। विदेश में बैठे आईएसआई समर्थित हैंडलरों द्वारा सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को बरगलाकर आतंकी हमले करवाने की यह साजिश महज चार दिनों में नाकाम कर दी गई और सभी सातों आरोपी सलाखों के पीछे पहुँच गए। यह ऑपरेशन इस बात का प्रमाण है कि पंजाब में आतंक और अपराध के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर अमल हो रहा है।
