पंचकूला: हरियाणा पुलिस के द्वारा साइबर अपराध, धमकी भरे कॉल्स और रंगदारी की घटनाओं पर लगाम लगाने के उद्देश्य से अभेद्य मोबाइल ऐप लॉन्च किया गया है। यह पूरे भारत देश में अपनी तरह का पहला मोबाइल आधारित सुरक्षा प्लेटफॉर्म है जो नागरिकों को संदिग्ध कॉल्स, धमकी भरे संदेशों, स्टॉकिंग और डिजिटल उत्पीड़न से बचाने में सक्षम होगा।
इस पहल के साथ ही हरियाणा देश का पहला ऐसा राज्य बन चुका है। जहां पर इस तरह की अनूठी पहल की गई है। डीसीपी पंचकूला सृष्टि गुप्ता ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए ऐप के बारे में ज्यादा जानकारी देते हुए बताया कि बदलते समय अपराधी इंटरनेट आधारित कॉलिंग, फर्जी नंबरों और डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल करके लोगों को डराने और ठगी करने का प्रयास कर रहे हैं।
ऐसे में यह ऐप नागरिकों के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच साबित होगा। उन्होंने बताया कि देश के अंदर से आने वाली कॉल्स को ट्रेस करना अपेक्षाकृत सरल होता है। वहीं विदेशी नंबरों से आने वाली कॉल्स एक बड़ी तकनीकी चुनौती पेश करती हैं। इसी चुनौती से निपटने के लिए हरियाणा पुलिस के तकनीकी विशेषज्ञों ने सशक्त समाधान विकसित किया।
अभेद्य ऐप के सफल परीक्ष के बाद कुछ दिनों पहले ही इसे लॉन्च किया गया है। डीसीपी ने बताया कि यह ऐप एंड्रॉयड और एप्पल दोनों प्लेटफॉर्म पर मौजूद है। इस ऐप को डाउनलोड करने के लिए इच्छुक व्यक्ति को पुलिस उपायुक्त कार्यालय, एसीपी कार्यालय, साइबर सेल शाखा, नजदीकी थाना और चौकी को सूचित करना होगा। इसके बाद उसे अधिकृत एक्सेस प्रदान किया जाएगा।
डीसीपी ने आगे बताया कि अभेद्य ऐप अज्ञात और संदिग्ध नंबरों से आने वाली कॉल्स और संदेशों की पहचान करके उन्हें उपयोगकर्ता तक पहुंचने से पहले ही रोक देता है। यह खास तौर पर अंतरराष्ट्रीय, वर्चुअल और अनसेव्ड नंबरों की निगरानी करता है तथा संदिग्ध पाए जाने पर कॉल को तुरंत रिजेक्ट कर नंबर को ब्लॉक कर देता है।
यह ऐप संदिग्ध चैट, वॉयस मैसेज, नोटिफिकेशन और वॉयस नोट को भी डिवाइस से हटा देता है। इससे उपयोगकर्ता किसी भी तरह के मानसिक दबाव या डर से सुरक्षित रह सके। इतना ही नहीं विदेशों से आने वाली संदिग्ध कॉल्स पर भी नजर जाएगी। इससे एक ओर उपयोगकर्ता मानसिक दबाव से दूर रहेगा। वही दूसरी ओर संदिग्ध कॉल करने वाले व्यक्ति को हरियाणा पुलिस के द्वारा बैकहैंड से ट्रेस किया जाएगा।
यह ऐप नागरिकों को धमकी भरे कॉल्स, रंगदारी के प्रयासों और साइबर अपराध से बचाने में जरुरी भूमिका निभाएगा। इससे अपराधियों के द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले गुमनाम संचार माध्यमों पर रोक लगेगी और उनके पहचान एवं ट्रैकिंग कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए ज्यादा आसान हो पाएगी। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि डिजिटल अरेस्ट जैसी उभरती चुनौतियों से निपटने के लिए हरियाणा पुलिस द्वारा ड्यूल ओटीपी सिस्टम लागू किया गया है।
इस पहल के अंतर्गत एचडीएफसी बैंक के अधिकारियों के साथ मिलकर काम किया गया है। शुरुआती चरण में 60 वर्ष या उससे ज्यादा उम्र के खाताधारतों को उसमें शामिल किया गया है। बैंक में जाकर इस सुविधा का फायदा प्राप्त कर सकते हैं। इस व्यवस्था के अंतर्गत किसी भी वित्तीय लेन-देन के लिए आने वाला ओटीपी मूल खाताधारकों के बैंक लेन-देन की सीमा भी निर्धारित की जाएगी। इससे किसी भी तरह की धोखाधड़ी की संभावना को न्यूनतम किया जा सके।
इस अभिनव व्यवस्था के लागू होने से डिजिटल अरेस्ट जैसे साइबर अपराधों पर प्रभावी रोक लगेगी। उन्होंने बताया कि विभाग के उच्च अधिकारियों के द्वारा इस बारे में भारतीय रिजर्व बैंक एवं विभिन्न बैंकों के अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित कर विस्तृत रुपरेखा तैयार की जा रही है।
